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करनाल: जिला अस्पताल में साढ़े 5 घंटे बिजली गुल, जनरेटर भी फेल; ओटी से प्रसूति वार्ड तक हड़कंप

सुनील कुमार Updated Mon, 13 Jul 2026 06:27 PM IST

माई सिटी रिपोर्टर करनाल। जिला नागरिक अस्पताल में रविवार शाम करीब 4:30 बजे बिजली आपूर्ति ठप हो गई। अस्पताल हॉटलाइन फीडर से जुड़ा होने के बावजूद करीब साढ़े पांच घंटे बाद रात 9:30 बजे बिजली बहाल हो सकी। इस बीच वैकल्पिक व्यवस्था भी जवाब दे गई। अस्पताल का एक जेनसेट पहले से खराब था जबकि दूसरा पूरे अस्पताल का लोड नहीं संभाल सका और कुछ देर बाद वह भी बंद पड़ गया। नतीजा यह रहा कि वार्डों से लेकर प्रसूति कक्ष तक अंधेरा और उमस छा गई। जब तीन घंटे तक बिजली सुचारु नहीं हो सकी तब प्रबंधन द्वारा गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज भेजने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। एक वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज और एक सिजेरियन डिलीवरी वाली महिला को रेफर किया गया, जबकि कई परिजन अपने मरीजों को स्वयं निजी अस्पतालों में ले गए। एक कैंसर मरीज के परिजन ने कहा कि दोपहर से बिजली नहीं है, इसलिए अब उसे दिल्ली ले जाया जाएगा। अस्पताल परिसर में कई घंटे तक लोग मोबाइल की टॉर्च के सहारे रास्ता तलाशते रहे। उमस के कारण तीमारदार हाथ वाले पंखों से मरीजों को हवा करते दिखाई दिए। नवजात बच्चों को भी परिजन वार्डों से बाहर लेकर घूमते रहे। सूचना मिलते ही पीएमओ डॉ. सारिका बिश्नोई स्वयं अस्पताल पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। --- सबसे अधिक प्रसूति वार्ड में बढ़ी मुश्किल बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर प्रसूति एवं महिला वार्ड पर दिखाई दिया। ऑपरेशन के बाद भर्ती महिलाओं को उमस और गर्मी में घंटों रहना पड़ा। कई महिलाओं के टांकों पर लगातार पसीना आता रहा। परिजनों का आरोप है कि गर्मी और घुटन के कारण दो प्रसूताएं चक्कर खाकर गिर गईं। नवजात शिशुओं को भी वार्ड से बाहर बरामदों में लेकर घूमते रहे ताकि उन्हें थोड़ी खुली हवा मिल सके। --- हाथ के पंखों से हवा, मोबाइल की टॉर्च बनी सहारा अस्पताल के वार्डों का दृश्य किसी आपदा से कम नहीं था। बिजली नहीं होने के कारण मरीजों के परिजन हाथ वाले पंखों से हवा करते दिखाई दिए। कई लोग अखबार और गत्ते से हवा कर रहे थे। गलियारों में मोबाइल की टॉर्च जलाकर डॉक्टर और नर्सें मरीजों तक पहुंच रही थीं। बुजुर्ग, बच्चे और गंभीर मरीज सबसे ज्यादा परेशान रहे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जेनसेट में पर्याप्त डीजल भी उपलब्ध नहीं था जिसके कारण समय पर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने डीजल की कमी के आरोप से इनकार किया। --- बिजली निगम ने केबल बॉक्स को बताया वजह बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता नसीब सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल को आपूर्ति देने वाले हॉटलाइन फीडर का केबल बॉक्स क्षतिग्रस्त हो गया था। मरम्मत के कई प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में वैकल्पिक माध्यम से आपूर्ति बहाल की गई। --- पीएमओ बोलीं- इतनी लंबी कटौती स्वीकार्य नहीं पीएमओ डॉ. सारिका बिश्नोई ने कहा कि हॉटलाइन फीडर पर इतने लंबे समय तक बिजली बाधित रहना गंभीर विषय है। मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए गंभीर मरीजों को तुरंत मेडिकल कॉलेज भेजा गया। रात तक दोनों जेनसेट भी दुरुस्त करा दिए गए। पूरे मामले की रिपोर्ट बिजली निगम से मांगी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

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