केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में शुक्रवार को टिकाऊ पराली प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जापान के वैज्ञानिकों, हरियाणा, पंजाब समेत देशभर से आए किसानों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पराली प्रबंधन के टिकाऊ और किफायती समाधानों पर चर्चा करना था। वैज्ञानिकों ने बताया कि मौजूदा पराली प्रबंधन मशीनें अत्यधिक महंगी हैं और किसानों के लिए हर काम के लिए अलग-अलग मशीनें रखना संभव नहीं है। कार्यशाला में जापान और भारतीय संस्थानों के सहयोग से "कट सायलर" मशीन को संभावित समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह मशीन एक ही उपकरण से पराली प्रबंधन के कई कार्य करने में सक्षम हो सकती है। खेतों में कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग पर चिंता कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने गेहूं और धान की फसल में कीटनाशकों और खरपतवार नाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन रसायनों के कारण खाद्यान्न मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनता जा रहा है। किसानों की मांग किसानों ने सीधी बिजाई के लिए अधिक उत्पादन देने वाली और पानी की बचत करने वाली नई फसल किस्मों की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी तकनीक विकसित की जाए जो फसल की बीमारियों को कम करे और उत्पादन को बढ़ावा दे। संस्थान का दृष्टिकोण केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. आर.के. यादव ने बताया कि इस कार्यशाला में विभिन्न संस्थानों, वैज्ञानिकों और किसानों के सुझावों पर मंथन किया गया है। इन निष्कर्षों के आधार पर एक साझा रणनीति तैयार की जाएगी, जिसे भारत सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा।