करनाल में ब्राह्मण सभा के पूर्व प्रधान सुरेंद्र शर्मा से जुड़ा एक विवाद सुर्खियों में है। इस मामले में ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा। सुरेंद्र शर्मा ने 27 जुलाई की रात को हुए एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि वे सभा कार्यालय में फोन पर बात कर रहे थे, तभी कमेटी के एक सदस्य ने उनके साथ अशोभनीय भाषा में बात की और आक्रामक रवैया अपनाया। यह पूरा घटनाक्रम कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया। सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि रिवॉल्वर से संबंधित आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि वे अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर को किसी अनहोनी से बचने के लिए अपनी गाड़ी में रखने जा रहे थे। तभी कमेटी के सदस्य लाजपत राय और मांगेराम शर्मा ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और रिवॉल्वर छीनने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना को तोड़-मरोड़कर और जानबूझकर गलत तरीके से मीडिया और समाज के सामने पेश किया गया।शर्मा ने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से समाज सेवा में सक्रिय हैं और पांच बार ब्राह्मण सभा के प्रधान पद पर निर्वाचित होकर समाज की सेवा कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि समाज ने हमेशा उन पर भरोसा जताया है और वे आज भी पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहे हैं।उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में ब्राह्मण सभा के चुनाव लंबित हैं और एसडीएम द्वारा नियुक्त चार सदस्यीय कमेटी, जिसमें सुशील गौतम, रामकरन, मांगेराम, और लाजपत राय शामिल हैं, का गठन किया गया है। इस कमेटी का कार्य केवल सभा की देखरेख और संचालन तक सीमित है, लेकिन लाजपत राय और मांगेराम अपने अधिकारों से बाहर जाकर मनमानी और सत्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि इन सदस्यों ने 1987 से चली आ रही चाय-भंडारे की परंपरा को बंद करने का प्रयास किया, जो समाज की आस्था और परंपरा का हिस्सा है। सुरेंद्र शर्मा ने मांग की कि पूरे मामले की सच्चाई सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सामने लाई जाए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील की ताकि "दूध का दूध और पानी का पानी" हो सके। समाज के अन्य सदस्यों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।