कुंजपुरा गांव में पेयजल संकट एक बार फिर गहराता जा रहा है। पाइपलाइन में लगातार हो रही लीकेज के कारण यहां के लोग दूषित और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नई पाइपलाइन डालते समय कनेक्शन सही तरीके से नहीं किए गए, जिसके चलते पानी में गंदगी मिल रही है। वहीं पुरानी जर्जर पाइप लाइन नालियों के नजदीक होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई घरों में नलों से गंदा पानी आ रहा है, जिसमें कीड़े तक दिखाई दे रहे हैं। इससे लोगों में बीमारी फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि पिछले एक साल से लगातार बनी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि एक साल पहले भी पाइपलाइन से दूषित पानी की आपूर्ति के कारण गांव में डायरिया फैल गया था। उस दौरान कई लोग बीमार पड़े थे और तीन लोगों की मौत तक हो गई थी। गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर गले और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों लोग इलाज के लिए पहुंचे थे। इसके बावजूद आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। वहीं स्थिति फिर से हो गई है दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं गांव की मुख्य स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें सिविल अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनस्वास्थ्य विभाग पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुंजपुरा गांव की निकासी ठप होने से यहां की सड़कों पर गंदा पानी आ जाता है इस कारण से यह लगातार टूट रही हैं। वहीं पूरे गांव की नालियां व जोहड़ भी ओवरफ्लो होकर बीमारियों का जनक बन रहे हैं। पेयजल समस्या के साथ-साथ कुंजपुरा से बडागांव की ओर जाने वाली मुख्य सड़क भी करीब चार साल से टूटी पड़ी है। सड़क पर गहरे गड्ढे हैं, जिनमें नालियों का गंदा पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। इससे आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। यह सड़क मुगल माजरा, बडागांव और घीड़ होते हुए उत्तर प्रदेश तक जाती है, जिससे इस मार्ग पर आवागमन काफी रहता है।