सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का परफॉर्मेंस ट्रायल सोमवार को सफलतापूर्वक किया गया। रेलवे अधिकारियों की निगरानी में ट्रेन ने सोनीपत तक दो चक्कर लगाए और पूरे रूट पर इसकी कार्यक्षमता की जांच की गई। ट्रायल के दौरान ट्रेन की रफ्तार, ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया गया। रविवार को हाइड्रोजन प्लांट में गैस तैयार नहीं हो पाने के कारण ट्रेन का ट्रायल नहीं हो सका था। प्लांट में तकनीकी कारणों से पर्याप्त मात्रा में हाइड्रोजन गैस नहीं बन पाई थी, जिसके चलते निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ट्रेन को रवाना नहीं किया जा सका। इसके बाद रेलवे और प्लांट से जुड़े तकनीकी कर्मचारियों ने समस्या को दूर करने के लिए काम किया। सोमवार को स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रेन को जींद से सोनीपत के लिए रवाना किया गया। ट्रेन ने पूरे रूट पर दो बार आवाजाही की और हर स्टेशन तथा ट्रैक के विभिन्न हिस्सों पर इसके प्रदर्शन का आकलन किया गया। हर जंक्शन पर ट्रेन को एक से दो मिनट पर रोका गया। ट्रेन सुबह लगभग साढ़े सात बजे हाइड्रोजन प्लांट के यार्ड से निकली। इसके बाद ट्रेन को जींद जंक्शन पर लाया गया। वहां से ट्रेन लगभग सुबह सवा 11 बजे सोनीपत के लिए रवाना हुई। ट्रेन दोपहर लगभग दो बजकर 50 मिनट पर सोनीपत पहुंची थी। यहां दस मिनट ठहराव के बाद ट्रेन दोपहर तीन बजे सोनीपत से जींद के लिए रवाना हुई और शाम पांच बजकर दस मिनट पर ट्रेन जींद पहुंची। इसके बाद ट्रेन शाम साढ़े पांच बजे जींद से सोनीपत के लिए दोबारा चली। इस बार ट्रायल के लिए पानी की कैनियों को दोबारा से ट्रेन में रखा गया है।अधिकारियों के अनुसार ट्रायल के दौरान सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। फिलहाल ट्रेन के विभिन्न चरणों में ट्रायल किए जा रहे हैं, ताकि नियमित संचालन से पहले सभी तकनीकी पहलुओं को पूरी तरह परखा जा सके। यदि आगामी दिनों में होने वाले ट्रायल भी सफल रहते हैं, तो जल्द ही इस रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन को नियमित रूप से चलाने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इससे यात्रियों को भी आधुनिक और स्वच्छ तकनीक वाली ट्रेन में सफर करने का मौका मिलेगा।