जींद से बनभौरी धाम के लिए जाने वाली बस का एक फेरा और बढ़ा दिया गया है। अब दिन में दो बार बस जींद से बनभौरी के लिए अप डाउन करेगी। नवरात्रि के चलते यात्रियों की सुविधा के लिए रोडवेज अधिकारियों ने बस का एक चक्कर बढ़ाने का निर्णय लिया है। बता दें कि अगस्त माह की शुरुआत में यात्रियों की मांग पर रोडवेज जींद डिपो ने जींद से बनभौरी धाम के लिए बस चलाई थी। इससे पहले यह बस लगभग चार महीने से बंद थी। सुबह आठ बजे के आसपास जींद से बस बनभौरी धाम के लिए चलेगी, जो वहां से वापस आने के बाद दोबारा दोपहर दो बजे फिर से धाम के लिए रवाना होगी। पहले बस केवल दोपहर बाद दो बजे से जींद बस स्टैंड से चलती थी, जो उचाना होते हुए बनभौरी धाम पहुंचती थी। अगले दिन सुबह सात बजे बस बनभौरी से चलकर जींद सुबह आठ बजे पहुंचती थी। जींद पहुंचने के बाद बस को अन्य रूट पर चलाया जाता था, लेकिन अब सुबह आठ बजे के बाद फिर से बस बनभौरी धाम के लिए चलेगी। जींद से बनभौरी का किराया 60 रुपये है। बतां दे कि बनभौरी धाम की काफ ी मान्यता है। शक्तिपीठ माता भ्रामरी देवी मंदिर बरवाला के बनभौरी गांव में स्थित है। यहां मंदिर में 24 घंटे माता के दरबार में अखंड ज्योत जलती है। नवरात्र में काफ ी तादाद में श्रद्धालु मां की पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। यहां मंदिर में नवरात्र पर सैकड़ों की संख्या में अखंड ज्योत जलाई जाती है। नवरात्र मेले में विशेषत चतुर्थी से लेकर षष्ठी तक मेले में भक्त आते हैं। छट पर माता भ्रामरी की पूजा का विशेष महत्व है। मंदिर का इतिहास बनभौरी धाम मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। यहां मान्यता है कि माता भ्रामरी देवी व अष्टभुजी माता महिषासुर वर्धनी की मूर्तियां धरती से ही प्रकट हुई थी। माता के दरबार में आकर श्रद्धालु श्रृद्धा के साथ धागा बांधकर मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर यहां दरबार में हाजिरी लगाते है। यहां श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं। नव विवाहित जोड़ों के द्वारा माता का आशीर्वाद लेने की परंपरा वर्षों पुरानी है। मंदिर की विशेषता नवरात्र में नव दंपति गठ जोड़े खासतौर से पहुंचकर मां से मन्नत मांगते हैं। अष्टमी और नवमी को कढ़ाई चढ़ाई जाती है। ऐसे में यहां काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्रि में यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण जींद से बनभौरी जाने वाली बस का एक फेरा और बढ़ाया गया है