देश में प्रस्तावित डिजिटल जनगणना 2027 के अंतर्गत वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय, बहादुरगढ़ को एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित किया गया, जहां जनगणना अधिकारियों (शिक्षकों) एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। यह पहल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक सशक्त कदम सिद्ध हुई। महाविद्यालय में प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 6 अप्रैल 2026 से किया गया, जिसे सुव्यवस्थित रूप से आठ बैचों में आयोजित किया गया। प्रत्येक बैच में प्रतिभागियों को क्रमबद्ध रूप से डिजिटल जनगणना की प्रक्रियाओं, तकनीकी उपकरणों एवं व्यवहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम अत्यंत प्रभावी एवं सफल रहा। जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक डिजिटल सूचीकरण की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। इस चरण में विशेष रूप से मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना को शामिल किया गया है। यह संपूर्ण प्रक्रिया देश के प्रत्येक नागरिक से संबंधित सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी के व्यवस्थित संकलन का आधार बनती है। जनगणना का महत्व अत्यंत व्यापक है, क्योंकि इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़े सरकार को विभिन्न विकास योजनाओं, नीतियों तथा संसाधनों के समुचित वितरण में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास तथा सामाजिक कल्याण से संबंधित योजनाओं का निर्माण और उनका प्रभावी क्रियान्वयन जनगणना के सटीक आंकड़ों पर ही निर्भर करता है। यह प्रक्रिया देश की जनसंख्या संरचना, विकास की आवश्यकताओं तथा क्षेत्रीय असमानताओं को समझने का एक सशक्त माध्यम है। डिजिटल माध्यम से जनगणना का आयोजन इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं त्वरित बनाता है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से डेटा संग्रहण में त्रुटियों की संभावना कम होती है, जानकारी का तत्काल संकलन एवं विश्लेषण संभव हो पाता है तथा प्रशासनिक कार्यों में गति आती है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल एप्लिकेशन एवं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सेल्फ एन्यूमरेशन जैसी सुविधाएं नागरिकों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करती हैं, जिससे जनगणना अधिक समावेशी एवं सुलभ बनती है। महाविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशालाओं के दौरान प्रतिभागियों को डिजिटल डेटा संग्रहण , मोबाइल एप्लिकेशन के उपयोग, तथा जनगणना पोर्टल के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, डेटा की शुद्धता, गोपनीयता एवं समयबद्धता पर विशेष बल दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत बी.एड. एवं एम.एड. के स्वयंसेविकाओं को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा गया, जिससे उन्हें वास्तविक क्षेत्रीय कार्य का अनुभव प्राप्त हो सके। प्रतिभागियों को गोपनीयता , फील्ड प्रोटोकॉल, तथा सेल्फ एन्यूमरेशन की प्रक्रिया के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि नागरिकों को उनके मोबाइल नंबर के माध्यम से सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी प्राप्त करने में किस प्रकार सहायता प्रदान की जा सकती है। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन डॉ. प्रदीप कुमार एवं भूपेंद्र सिंह, सहायक प्रोफेसर, गवर्नमेंट कॉलेज, बहादुरगढ़ द्वारा विशेषज्ञता के साथ किया गया। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को तकनीकी एवं व्यवहारिक दोनों प्रकार की जानकारी प्रदान की गई, जिससे वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य के लिए पूर्णतः तैयार हो सके। पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम नीरज कुमार, भूमि अधिकारी, बहादुरगढ़ के समन्वय (कोऑर्डिनेशन) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उनके निर्देशन में कार्यक्रम का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया गया, जिससे सभी बैचों में प्रशिक्षण व्यवस्थित एवं प्रभावी रूप से संपन्न हो पाया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महाविद्यालय के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हुआ, जिसने क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा एवं राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भावी अध्यापिकाओं को यह प्रशिक्षण महाविद्यालय की एन एस एस व वाई आर सी इकाई तथा एस एस क्लब द्वारा आयोजित कराया गया।