घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने के बाद गोलगप्पे और टिक्की की रेहड़ी लगाने वाले अब पलायन को मजबूर है। रेहड़ी लगाने वालों का कहना है कि उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा है जिसके चलते उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में अब उनके लिए क्षेत्र में रहकर मकान का किराया और परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। एक-दो दिन और ऐसे हालात रहे और रोजी-रोटी के लिए गैस सिलेंडर नहीं मिला तो वह मजबूर होकर उत्तर प्रदेश चले जाएंगे।