संवाद न्यूज एजेंसी झज्जर। कुख्यात संजय बिरधाना एनकाउंटर में उसके परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताते हुए एनकाउंटर को फर्जी बताया है। संजय के ताऊ वीरभान हरियाणा पुलिस ने रिटायर्ड हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, वह बिल्कुल मनघड़ंत है। उसमें संजय को घटनास्थल पर पैदल दिखाया गया है। जबकि अगर कोई किसी की हत्या करने जाएगा तो पैदल क्याें जाएगा। हत्या करने के बाद वहां से उसे भागना भी पड़ेगा। ऐसे में पूरी कार्रवाई ही संदेहास्पद है। वहीं परिजनों ने झज्जर में पोस्टमार्टम कराने से इंकार करते हुए रोहतक पीजीआई में चिकित्सकों के बोर्ड से कराने की मांग की है। झज्जर पुलिस की सीआईए और एसटीएफ टीम ने शुक्रवार को गांव काड़ोदा और रणखंडा के बीच रात करीब आठ बजे संजय बिरधाना का एनकाउंटर किया था। पुलिस के अनुसार वह अपने साले की हत्या करने के लिए काड़ोदा जाने के प्रयास में था। पुलिस ने उसे घेर लिया और सरेंडर करने के लिए कहा। उसने जब पुलिस पर गोली चलाई तो जवाबी कार्रवाई में उसको तीन गोलियां लगी जिससे उसकी मौत हो गई। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मियों को भी गोली लगने की बात कही गई, जिसमें सब इंस्पेक्टर संयम की बाजू को छू कर गोली निकल गई। वहीं सीआईए झज्जर इंचार्ज और एक अन्य पुलिसकर्मी की बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी है। 16 घंटे तक नहीं दिखाया शव संजय बिरधाना के ताऊ वीरभान का आरोप है कि पुलिस ने 16 घंटे तक उसको शव नहीं दिखाया। रात को भी परिवार के लोग अस्पताल में आए थे, मगर पुलिस ने एफएसएल जांच की बात कहते हुए शव दिखाने से इंकार कर दिया। एफएसएल जांच मौके पर ही होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में शव लाने के बाद एफएसएल जांच करने की बात हजम नहीं हो रही है। परिवार को शनिवार दोपहर करीब 2 बजे के बाद शव दिखाया गया। पुलिस कमिश्नर ने नहीं उठाया फोन संजय बिरधाना के आरोपों के बारे में जब बात करने के लिए पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नही उठाया।