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मेरी गांव, मेरी शान: प्रदेश की राजनीति में कभी था दबदबा, अब 12 साल से विधानसभा टिकट का इंतजार कर रहा है बादली, ब्लॉक समिति और जिला परिषद में भी नहीं है प्रतिनिधित्व

बादली।गांव बादली इन दिनों राजनीतिक उपेक्षा को लेकर चर्चा में है। करीब 18 हजार की आबादी वाला यह गांव पिछले 12 वर्षों से किसी भी बड़े राजनीतिक दल से विधानसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व नहीं पा सका है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखने वाला बादली आज राजनीतिक रूप से हाशिये पर पहुंच गया है। एक समय था जब बादली का नेतृत्व 5 बार विधायक और हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री तक रहे चौधरी धीरपाल सिंह करते थे। वहीं, बादली के नरेश शर्मा भी दो बार विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नरेश शर्मा को तीसरी बार टिकट दी थी, जबकि इनेलो ने चौधरी धीरपाल सिंह की पत्नी सुमित्रा गुलिया को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद वर्ष 2019 और 2024 के विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रमुख दल ने बादली गांव के नेता को टिकट नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि हल्के का सबसे बड़ा गांव होने के बावजूद राजनीतिक दलों ने बादली से किनारा कर लिया है। छोटे दलों के उम्मीदवार के रूप में नाहर सिंह ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन वर्ष 2014 के बाद बादली को किसी भी बड़े दल से राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। ऐसे में गांव के लोग आज भी अपने गांव से विधानसभा टिकट की मांग उठा रहे हैं।

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