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मेरा गांव, मेरी शान: दुर्जन शाह फकीर ने 1120 ईस्वी में बसाया दुजाना गांव

करीब 16 हजार की आबादी वाला दुजाना गांव दुर्जन शाह फकीर ने 1120 ईस्वी में बसाया था। गांव में नवाबी समय की ऐतिहासिक इमारतें आज भी गांव की शोभा बढ़ा रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव दुजाना में नवाबी समय से आधुनिक शहरों जैसी सुविधाएं थी। कहा जाता है कि उस दौर दिल्ली अंधेरे में डूबी रहती थी, लेकिन दुजाना के नवाब ने बिजली की सुविधा थी। दुजाना से दिल्ली तक बस सुविधा और पानी निकासी की भी अंडरग्राउंड व्यवस्था थी। गांव की सुरक्षा के लिए गांव के चार कोनों में चार गेट थे और सभी गेटों पर एक-एक तोप लगी हुई थी। अंतिम नवाब इकतीदार अलीखां जाते समय दो तोप अपने साथ फैसलाबाद ले गए जबकि दो तोपें जिन पर दुजाना स्टेट की मुहर लगी हुई हैं, वह अब रोहतक के मानसरोवर पार्क की शोभा बढ़ा रही हैं। दुजाना गांव की एक खास बात यह भी है कि दुजाना निवासियों के खून में संगीत बसा हुआ है। कई लोक गायक और कलाकार इस गांव की मिट्टी से जन्मे हैं। वहीं नवाबी समय से ही गांव दुजाना कारोबार का केंद्र बिंदु था। अब भी दुजाना गांव की बनी पटि्टयां विदेशों में भी सप्लाई की जाती हैं। ऐसे पड़ा गांव का नाम 1120 ईस्वी में जिस स्थान पर गांव बसा हुआ है, वहीं बिहड़ यानी जंगल था। इस जंगल में दुर्जन शाह फकीर आए थे और उन्होंने वन में तपस्या की थी। तभी दुर्जन शाह फकीर ने ही गांव बसाया था और उन्हीं के नाम से गांव का नाम पड़ा। बाद में फकीर ने गांव में एक स्थान पर समाधि ले ली। उसी स्थान पर ग्रामीणों ने बाबा की मजार बना दी। आज भी उस मजार पर ग्रामीण पूजा करते हैं और प्रतिवर्ष बाबा की याद में भंडारा लगाया जाता है। दुजाना में चार मस्जिद, सभी की थी कनेक्टिविटी दुजाना गांव में चार प्रसिद्ध मस्जिद हैं, जिनमें से एक मस्जिद आज भी अपने पुराने अंदाज में दिखाई देती है।ग्रामीणों के अनुसार मस्जिदों में दिल्ली में पीली कोठी तक और नाहड़ कोसली तक लंबी सुरंगें हैं। हालांकि अब ये सुरंगें इतिहास बनकर रह गई हैं, लेकिन नवाबी समय में इनका खूब इस्तेमाल होता था। सभी सुरंगों की आपस में कनेक्टिविटी थी। नवाबी परिवार इन सुरंगों का प्रयोग करते थे। कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है गांव में गांव दुजाना में कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। फिल्म मंगल पांडे की शूटिंग भी गांव की लाल मस्जिद में हुई थी। इसी से ही गांव की लोकप्रियता का पता चलता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में हरियाणवी फिल्मों और गानों की शूटिंग तो होती ही रहती है। दुजाना निवासियों के खून में बसा है गीत संगीत दुजाना की खास बात यह है कि यहां के निवासियों के खून में गीत-संगीत बसा है। हरियाणवी पहली फिल्म चंद्रावल और जर-जोरू और जमीन में हरीश अरोड़ा, लोक गायक सुनील दुजानिया, लोक गायक एवं कलाकार दीपक कपूर, जिसने सुल्तान फिल्म में भी अपनी प्रतिभा को दिखाया, सभी दुजाना की मिट्टी से निकले हैं। नवाब के समय में भी होती थी रामलीला दुजाना रियासत के अधीन करीब 100 गांव आते थे। इन सभी गांवों की कोर्ट यहीं पर लगती थी, जिसमें हांसी-हिसार के 14 गांव, नाहड़-कोसली के 12 गांव और दुजाना के आसपास के 75 गांव आते थे। दुजाना एक बड़ी रियासत थी। दुजाना का अंतिम नवाब ईकतीदार अली खां शांतिप्रिय था। नवाब के कार्यकाल में कभी लड़ाई-झगड़ा नहीं हुआ। तब भी गांव में रामलीला का आयोजन था और श्रीराधा-कृष्ण और श्रीराम की झांकियां निकाली जाती थीं। गांव दुजाना में नवाब के समय की ऐतिहासिक इमारतें आज भी गांव की शोभा बढ़ा रही हैं। नवाब के समय में काराजी मस्जिद से दादरी के पहाड़ दिखाई देते थे, लेकिन रखरखाव के अभाव में अब सभी दम तोड़ रही हैं। सभी मस्जिदों की सुरंगों की आपस में कनेक्टिविटी थी। नानू, गांव दुजाना निवासी दुर्जन शाह फकीर ने गांव दुजाना को बसाया था। हमें अपने गांव पर गर्व है कि हमारा गांव ऐतिहासिक है और नवाबी समय की यादें आज भी संजोए हुए हैं। अगर उचित देखभाल की जाती तो दुजाना पर्यटन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकता था। रघुवीर सिंह, ग्रामीण दुजाना ऐतिहासिक गांव हैं। एशिया का पहला ऐसा गांव है, जिस गांव की चहा दिवारी होती थी ओर चारों तरफ गेट होते थे और सभी गेटों पर एक-एक तोप लगी हुई थी। अंतिम नवाब इकतीदार अलीखां जाते समय दो तोप अपने साथ फैसलाबाद ले गए थे जबकि दो तोपें जिन पर दुजाना स्टेट की मुहर लगी हुई हैं, जोकि अब भी रोहतक के मान सरोवर पार्क की शोभा बढ़ा रही हैं। अगर दिल्ली के लिए पहली बस चली थी तो वह भी गांव दुजाना से शुरू हुई थी। मनीष शर्मा, पूर्व चेयरमैन, मार्किट कमेटी गांव दुजाना में ग्रामीणों का आपसी भाईचारा हैं और गांव का इतिहास एक हजार वर्ष पुराना हैं। गांव को दुर्जन शाह फकीर ने बसाया था। बाबा के नाम पर ही गांव का नाम दुजाना पड़ा हैं। बाबा की मजार पर प्रतिवर्ष भंडारा लगाया जाता हैं और ग्रामीण पूजा-अर्चना करते हैं। रणबीर सिंह, ग्रामीण गांव एक नजर में -गांव की आबादी-लगभग 16 हजार -मतदाता- करीबन 6600 मतदाता -राजकीय विद्यालय -चार -पशु अस्पताल-एक -सरकारी अस्पताल-एक -बैंक-एक -डाकखाना-एक -मंदिर- 12 -महाविद्यालय-एक

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