इंडियन वेटरन आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष सेवानिवृत्त रिसालदार मेजर सुरेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने देश के लिए बलिदान दिए हैं। हर कदम-कदम पर देश की रक्षा की है। उनके कार्यों को देखते हुए जिला प्रशासन को भी उनकी सुध लेनी चाहिए। वह आर्मी दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैनिकों ने सैनिकों के बलिदान को याद किया। सेवानिवृत्त रिसालदार मेजर सुरेंद्र सिंह ने कहा कि देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद उम्मीद रहती है कि सभी सेवाएं अच्छी तरह मिल पाएंगी, लेकिन कई सालों से जिले के पूर्व सैनिकों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। पांच साल से पूर्व सैनिक रेस्ट हाउस, अस्पताल और कैंटीन की सुविधाएं एक ही छत के नीचे करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। रेस्ट हाउस की बिल्डिंग कंडम हो चुकी है, लेकिन उसे तोड़कर दोबारा नहीं बनाया जा रहा। सैनिक बोर्ड का कार्यालय म्यूजिक में चल रहा है। झज्जन निवासी सूबेदार मेजर छाजूराम ने कहा कि साल 1949 में जनरल के एम करियप्पा ने भारत के पहले सेनाध्यक्ष के रूप में अपना पद ग्रहण किया था। यह एक ऐतिहासिक पल था। पहली बार भारतीय सेना की कमान एक भारतीय के हाथों में आई थी। ब्रिटिश राज के बाद, यह भारत के सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। जनरल करियप्पा ने 15 जनवरी को भारतीय सेना की कमान संभाली, इसलिए इस दिन को हर साल भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। खातीवास निवासी सूबेदार मेजर वीरेंद्र सिंह, चमनपुरा निवासी लेफ्टिनेंट वीरेंद्र सिंह, खेड़ी खुम्मार गांव निवासी लांस नायक राय सिंह यादव ने कहा कि आज पूर्व सैनिकों को अपने काम के लिए तीन अलग-अलग जगह घूमना पड़ता है। इलाज के लिए पुरानी तहसील, बोर्ड कार्यालय मेडिकल रोड और कैंटीन के लिए रेलवे स्टेशन रोड जाना पड़ता है। जेब से इतना पैसा किराये में ही लग जाता है। कड़ौदा निवासी सूबेदार जय सिह, बिरड़ माजरा निवासी सूबेदार मेजर जयनारायण, गांव तलाव निवासी सूबेदार अब्दुल जब्बार, चमनपुरा निवासी सूबेदार रामकिशन ने कहा कि पुरानी तहसील रोड स्थित सैनिक अस्पताल में दवा काउंटर केवल एक है। एक-एक घंटे तक लाइनों में लगकर दवा के लिए इंतजार करना पड़ता है। यहां कम से कम तीन काउंटर होने चाहिए। खेड़ी खुम्मार निवासी हवलदार प्रकाश, हवलदार भूप सिंह, सिलानी निवासी शौर्य चक्र विजेता कैप्टन जगबीर सिंह, झज्जर निवासी जेलदार आरके जंगू, डावला निवासी दफेदार धर्मबीर, गांव चमनपुरा निवासी सूबेदार मेजर महेंद्र सिंह, चमनपुरा निवासी सूबदार रामकिशन, जहाजगढ़ गांव निवासी सूबेदार कृष्ण कुमार, चमनपुरा निवासी लेफ्टिनेंट उमराव सिंह, चमनपुरा निवासी सूबेदार महेंद्र सिंह, जहाजगढ़ गांव निवासी हवलदार हजारीलाल ने कहा कि पूर्व सैनिकों के परिवारों को आधार कार्ड में गलत नाम होने पर उसे ठीक करवाने पर चक्कर काटने पड़ते हैं। इसके लिए बोर्ड को चाहिए कि वह किसी सत्यापन के लिए किसी अधिकारी की नियुक्ति करें ताकि पूर्व सैनिकों को परेशानी न हो।