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बहादुरगढ़ में श्रीमद् भागवत कथा में वामन अवतार की लीला का हुआ वर्णन

शहर के ओमेक्स सिटी स्थित श्रीकृष्णशरणम धाम सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और धर्ममय वातावरण में भागवत कथा का श्रवण किया। कथावाचक युगल कृष्णाचार्य महाराज ने तीसरे दिन भगवान विष्णु के वामन देव अवतार की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि वामन अवतार के माध्यम से भगवान ने अहंकार पर धर्म और भक्ति की विजय का संदेश दिया। महाराज ने कहा कि राजा बलि अत्यंत दानी और पराक्रमी थे, लेकिन जब उनमें अहंकार उत्पन्न हुआ, तब भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर उनसे तीन पग भूमि का वरदान मांगा। कथावाचक ने बताया कि पहले पग में भगवान वामन ने संपूर्ण पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश और स्वर्ग लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तब राजा बलि ने अपना शीश भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से युगल कृष्णाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को त्याग, समर्पण और विनम्रता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखता है, वही सच्चे अर्थों में भक्त कहलाता है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया और श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कथा के समापन पर आरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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