उमरा रोड पर शहर के साथ लगता गांव प्रेम नगर करीब 36 वर्ष पूर्व बसा था। जब लोगों ने इसे बसाया तो वह यहां प्रेम पूर्वक अपने जीवन का निर्वहन करते थे। लोगों के आपसी प्रेम व भाईचारा के कारण ही गांव को प्रेम नगर कहा जाने लगा। गांव में अभी सातवां सरपंच हैं। प्रेम नगर गांव की नींव करीब तीन दशक पहले उन मेहनतकश लोगों ने रखी थी, जो दूसरे शहरों और राज्यों से आकर यहां पर बसे थे। बताया जाता है कि करीब 30-40 वर्ष पूर्व रेलवे फाटक के साथ ही हैफेड की धागा मिल थी। मिल 24 घंटे चलती थी, जिसमें काम करने के लिए आस पास के गांवों सहित दूसरे शहरों के लोग भी आते थे। लोग जब यहां काम करने के लिए आने लगे तो मिल से आगे का एरिया खाली मैदान था। बाद में मिल में काम करने वाले लोगों ने जगह खरीदी व यहां पर रहना शुरु किया। साथ ही अन्य शहरों से भी लोग यहां पर आ गए। शुरुआत में यहां हाजमपुर, बरवाला, उकलाना, श्रीगंगानगर व अन्य शहरों से आकर लोग बसे थे। इसमें से अधिकांश रोजगार की तलाश में हांसी आए थे। गांव के बुजुर्गों के अनुसार जब लोग यहां कर आकर बसे तो उसमें काफी लोग धार्मिक प्रवर्ती के थे। लोग आपस में मिल जुलकर रहते थे। जिसे देखकर लोगों ने इसका नाम प्रेम नगर रख दिया। बाद में मिल बंद हुई तो लोगों ने अन्य काम काज तलाशा। गांव को 1993 में पंचायत का दर्जा मिला था। अब लोग गांव को शहर में जोड़ने की मांग उठाने लगे हैं।