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हिसार: नंगथला गांव का इकलौता स्कूल मैदान बना खेल और देश सेवा का 'हब', खिलाड़ी खुद ट्रैक बनाकर खेलने को मजबूर

अग्रोहा। जिला सचिवालय से करीब 34 किलोमीटर दूर अग्रोहा से बरवाला मार्ग पर बसा नंगथला गांव की 14 हजार के लगभग आबादी होने के बावजूद खेल ग्राउंड तक की सुविधा नहीं है। गांव का सरकारी स्कूल मैदान इस क्षेत्र की बहुमुखी प्रतिभाओं का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। सरकारी उपेक्षा के बावजूद युवाओं के हौसले बुलंद हैं। इस सरकारी स्कूल के इकलौते मैदान में सुबह और शाम दर्जनों युवा भारतीय सेना, हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों की शारीरिक परीक्षा के लिए उबड़-खाबड़ ट्रैक पर दौड़ लगाते हैं। इसी मैदान पर जहां एक तरफ लेदर बॉल क्रिकेट के चौके-छक्कों पर तालियां गूंजती हैं, वहीं दूसरी तरफ गांव के युवा नेट और पोल गाड़कर वॉलीबॉल का अभ्यास भी करते हैं। गांव के युवा रोहतास राजपूत रेसलिंग में राज्य स्तर तक रेस लगाकर आज फौज में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर वुशु खेल में अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जितेंद्र दुहन ने वर्ष 2012 में जीतकर गांव का नाम रोशन किया है। इस गांव में युवा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के बावजूद खुद का अलग से खेल स्टेडियम न होने से युवाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव के युवाओं ने 28 साल पहले शहीद भगत सिंह नाम से क्रिकेट टीम बनाकर खेलना शुरू किया था। तब से लेकर आज तक नंगथला की क्रिकेट टीम ने बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अस्थायी मैदानों पर पसीना बहाया। आज इस टीम का नाम हरियाणा के अलावा राजस्थान और पंजाब तक के बड़े लेदर बॉल टूर्नामेंट्स में बड़े सम्मान के साथ लिया जा रहा है।

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