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हिसार: विपक्षी नेताओं को पकड़ कर जेलों में ठूंसा, जबरन करवाई नसबंदी: सुभाष बराला

राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने कहा कि 26 जून 1975 को आपातकाल घोषित कर पूरे देश में विपक्षी नेताओं को पकड़ कर जेलों में ठूंस दिया गया। जबरन नसबंदी करवाई गई, जिसमें सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा बैठे। उन्होंने कहा कि उन काले दिनों की याद आज भी रोंगटे खड़े कर देती है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जिन सेनानियों ने यातनाएँ सही, उनका समाज सदा ऋणी रहेगा। आपातकाल की 50वीं बरसी के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला ने कहा कि जिस स्वतंत्रता को 28 वर्ष पहले लंबी संघर्षशील लड़ाई के बाद प्राप्त किया गया था, वह एक ही रात में छीन ली गई। अपने ही लोगों ने देश को फिर से परतंत्र बना दिया। मध्यरात्रि में घोषित आपातकाल का समाचार उस समय पूरे देश में नहीं फैल सका था। कई स्थानों पर समाचार पत्र प्रकाशित हुए, किंतु आपातकाल की खबरें उनमें नहीं थीं। दिल्ली, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों के अधिकांश अख़बारों की बिजली काट दी गई। समाचार पत्रों के कार्यालयों पर पुलिस ने कब्ज़ा कर लिया और संपादकों को हिरासत में ले लिया। इस मौके पर आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल यातनाएँ झेलने वाले सेनानियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ज़िला अध्यक्ष डॉ. आशा खेदड़ ने की।

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