जिला मनरेगा मजदूरों ने मनरेगा को बचाने के लिए जनसंपर्क अभियान के तहत गांव मौठ करनैल में विरोध मार्च निकाला। मनरेगा मजदूरों ने नारेबाजी कर करते हुए मनरेगा को जारी रखने की मांग की। “महात्मा गांधी मनरेगा बचाओ पैदल यात्रा” निकाली गई। मनरेगा मजदूरों, ग्रामीणों ने केंद्र सरकार की मनरेगा विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। मनरेगा मजदूर यूनियन के अध्यक्ष कृष्ण सुलचानी ने कहा कि 11 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर हड़ताल करेंगे। अखिल भारतीय मनरेगा सहयोग मंच के पदाधिकारियों ने बताया गया कि किस प्रकार केंद्र की मोदी सरकार की ओर से मनरेगा के तहत उनके काम पाने के अधिकार, न्यूनतम मजदूरी, ग्राम पंचायत की भूमिका और राज्य स्तर पर वित्तीय अधिकारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। मजदूरों ने काम की कमी, भुगतान में देरी, पंचायतों की अनदेखी और रोजगार सहायक व्यवस्था को कमजोर किए जाने की समस्याएं रखीं।वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा पर चार बड़े हमले किए गए हैं। 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी को व्यवहार में कमजोर किया जा रहा है। दूसरा, मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान का अधिकार छीना जा रहा है।तीसरा, ग्राम पंचायतों को दरकिनार कर उनके अधिकार समाप्त किए जा रहे हैं। चौथा, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालकर मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश रची जा रही है।कांग्रेस पार्टी मनरेगा को कमजोर नहीं होने देगी और मजदूरों के अधिकारों की यह लड़ाई गांव-गांव जारी रहेगी। ग्राम सभाओं के माध्यम से प्रस्ताव पारित कर यह मांग रखी गई कि मनरेगा में काम की कानूनी गारंटी को पूरी तरह बहाल किया जाए।।