प्रदेश के बड़े हिस्से में इस बार बारिश के सीजन में लंबे समय तक जलभराव रहा। जिसके चलते भूजल स्तर ऊपर आ गया है। ऐसे एरिया में गेहूं की बिजाई के बाद अब फसल में पीलापन आ गया है। जिसको लेकर किसान चिंतित दिखाई दे रहे हैं। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गेहूं विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई ने हल्की सिंचाई की सलाह दी है। डॉ. ओपी बिश्नोई ने कहा कि उन्होंने बताया कि पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधों में पीलापन दिखाई देता है। भूजल स्तर ऊपर आने तथा जमीन में लवण ऊपर आने पर यह स्थिति बनती है। इस बार प्रदेश के अधिकतर जिलों में लंबे समय तक अत्याधिक जलभराव रहा। जिस कारण गेहूं की फसल पर यह असर दिखाई दे रहा है। किसानों को सलाह दी जाती है कि 1 किलोग्राम यूरिया + 500 ग्राम जिंक सल्फेट (21%) + 500 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट + 300 ग्राम फेरस सल्फेट को 120-150 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में स्प्रे करें। इसके अलावा दूसरे विकल्प में 2% यूरिया (100 लीटर पानी में 2 किलो यूरिया) का भी छिड़काव कर सकते हैं। इसके बाद मैंगनीज सल्फेट का स्प्रे भी कर सकते हैं। ऐसा करने से पौधे को गलूकोज की तरह से फायदा मिलेगा। पौधे की जड़ें मजबूत हो जाएंगी उसे पोषक तत्वों की कमी पूरी हो जाएगी। पीलापन होने पर 1 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से मैंगनीज सल्फेट का स्प्रे करें। ऐसा करने से किसानों को दस दिन में ही असर दिखाई देने लगेगा।