परिवार पहचान पत्र लोगों के लिए परेशानी पहचान पत्र बन गया है। अमर उजाला टीम ने समाधान शिविर में पहुंच कर व्यवस्था को देखा तो पता लगा कि सबसे अधिक लोग पीपीपी की समस्या लेकर आए थे। पीपीपी के कारण लोगों के पास गाड़ी दिखा कर उनकी सुविधाएं बंद दी तो किसी का राशन कट गया। किसी को पेंशन नहीं मिल रही तो किसी 70 साल के दिव्यांग दंपत्ति की आय 1.40 लाख कर दी। नागोरी गेट से आए कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि मैंने छह महीने पहले अपनी गाड़ी बेची थी। गाड़ी को मेरी फैमिली आईडी से नहीं हटाया। तीन बार शिकायत दी तो मुझे बताया कि आपके नाम से हमने गाड़ी हटा दी है। इसके बाद मेरे नंबर पर 8087 नंबर की एक गाड़ी चढ़ा दी है। कभी ऊपर कभी नीचे चक्कर लगवाते हैं। पीपीपी वाली सीट पर बैठे लोगों को बात करने की भी तमीज नहींं है। यहां सीट पर बैठे पीपीपी वाले कहते हैं कि आप हर सप्ताह आ जाते हो। एक महीना इंतजार करो। डीसी से मिला तो एसडीएम के पास भेज दिया। एसडीएम से मिला तो उन्होंने कई चक्कर लगवा दिए। कैलाश चंद्र ने कहा कि मैंने अधिकारियों से पूछा कि आपने मेरे नाम जो गाड़ी चढ़ा दी वो मुझे दे ताे दो। इस पर अधिकारियों की बोलती बंद हो गई। महाबीर कालोनी से आए पालेराम ने बताया कि मेरे भतीजे ने कार चलाना सीखने के लिए 35 हजार रुपये की पुरानी गाड़ी खरीदी थी। यहां पीपीपी वालों ने मेरे भतीजे के नाम गाड़ी दिखा कर उसकी आय 35 हजार से बढ़ा कर 1.50 लाख कर दी। हमारा राशन कार्ड काट दिया, लाडो लक्ष्मी योजना का फार्म भी नहीं भरा जा रहा। मेरी पोतियों को भी समाज कल्याण विभाग से सहायता नहीं मिल रही।