चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूएच 1309 विकसित की है। यह किस्म अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक तापमान सहनशील है और गर्मी के बावजूद ज्यादा पैदावार देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किस्म हरियाणा समेत उत्तर भारत के किसानों के लिए वरदान साबित होगी। यह नई किस्म देर से बुआई करने वाले किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी और गेहूं की पैदावार में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करेगी। अधिक उपज और बेहतर गुण कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सिंचित परिस्थितियों में इस किस्म की औसत उपज 55.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और अधिकतम उपज 64.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक रही है। यह किस्म पारंपरिक किस्मों की तुलना में 12.7 प्रतिशत अधिक पैदावार देती है। इसकी बालियां लंबी, दाने मोटे और चमकदार होते हैं। बुआई का समय और खाद की मात्रा अनुसंधान निदेशक डॉ. राजवीर गर्ग ने बताया कि गेहूं की इस किस्म की बुआई का उत्तम समय 1 से 20 दिसंबर है। बुआई के लिए बीज की मात्रा 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है। अधिकतम उपज पाने के लिए 150 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फास्फोरस, 30 किलो पोटाश और 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की सिफारिश की गई है।