चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का 49वां सम्मेलन में मुख्य अतिथि हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण लाल मिढ्ढा ने कहा कि कृषि केवल भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार ही नहीं बल्कि हमारी सभ्यता की पहचान भी है। उन्होंने कहा कि सतत् कृषि, नवीनतम तकनीकों के समावेश और युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोडऩे की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है। देश के कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने तथा खाधान्न उत्पादन में वृद्धि करने में कृषि विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का एशिया महाद्वीप के कृषि विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण स्थान है। हकृवि ने अपने गठन के पश्चात 305 से अधिक विभिन्न फसलों की उन्नत किस्में विकसित करके देश के खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी करने में विशेष योगदान किया है। गत पांच वर्षों के दौरान हकृवि द्वारा 50 से अधिक किस्में विकसित एवं चिन्हित की गई हैं। जिनमें गेहूं, सरसों, मूंग, बाजरा तथा चारा फसलों की भी उन्नत किस्में शामिल हैं। उन्होंने सम्मेलन में स्नातक पाठ्यक्रम के कैटलॉग का विमोचन भी किया। इंडियन एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी संगठन के अध्यक्ष एवं जीबीपीयूएटी पंतनगर के कुलपति डॉ मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं घटती जोत जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को अपना चुके हैं जिसमें विशेष तौर पर विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत प्रैक्टिकल एक्टिविटी में समय देकर ज्ञान के साथ साथ उनका कौशल विकास भी किया जा रहा है। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान तकनीकी सत्रों में रखें जाने वाले विभिन्न विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रो. बीआर काम्बोज हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने कहा कि सम्मेलन में खेत से भविष्य तक: कृषि में नए क्षेत्रों का अन्वेषण, विकसित भारत 2047: कृषि संस्थानों की भूमिका और योगदान तथा सतत कृषि के भविष्य के लिए परंपरा और प्रौद्योगिकी का सेतु बनाना विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। कृषि में नए आयाम के तहत स्मार्ट एवं डिजिटल कृषि, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज तथा कृषि उद्योग एवं मूल्य संवर्धन को प्राथमिकता देनी होगी