केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के निदेशक यशपाल शर्मा ने बताया कि भैंस के गर्भाधान की जांच के लिए टेस्ट किट जल्द ही बाजार में आएगी। उन्होंने बताया कि सीआईआरबी ने इस तकनीक को तैयार किया था। एक निजी कंपनी को एमओयू के तहत यह तकनीक सौंपी गई है। कंपनी जल्द ही किट को मार्केट में उपलब्ध कराएगी। केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र में सेवा पखवाड़ा के तहत स्वच्छताेत्सव मनाया गया। इस उत्सव के समापन मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र के निदेशक यशपाल शर्मा ने कहा कि हर पशु पालक को कृत्रिम गर्भाधान कराना चाहिए। जिससे उनके पशु की दूध देने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। पशु के मूत्र से उसके गर्भाधान की जांच की जाने की तकनीक काफी पहले विकसित की थी। उसमें लगातार सुधार व बदलाव किए गए हैं। 30 दिन के बाद पशु के गर्भाधान की जांच की जा सकती है। सीआईआरबी ने इस तकनीक के आधार पर किट तैयार करने के लिए एक निजी कंपनी से एमओयू किया है। वह कंपनी किट तैयार कर बाजार में पशु पालकों को उपलब्ध कराएगी। संस्थान को इसके लिए रॉयल्टी मिलेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक भैंस के गर्भाधान की जांच के लिए पुराने तरीके से की जा रही है। जिसमें हाथ से ही पशु के गर्भाधारण की जांच होती है।