धान की फसल लेने के बाद बची पराली किसानों के लिए जी का जंजाल बन रही है। एक तरफ जहां प्रशासन पराली जलाने वालों पर कार्रवाई कर रहा है, वहीं जो किसान पराली प्रबंधन कर रहे हैं, उनको भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फतेहाबाद निवासी किसान दया सिंह ने बताया कि पराली की गांठें बनाने वाले समय पर नहीं आते हैं। जिस कारण उन्हें दिक्कत होती है। इस कारण किसान गेहूं की बिजाई समय पर नहीं कर पाते हैं। दया सिंह ने बताया कि उनके खेत में बेलर संचालक पराली की गांठे करीब 10 दिन पहले बना चुका है। मगर अभी तक इसे कोई उठाने नहीं आया है, जब तक यह गांठें नहीं उठेंगी, तब तक गेहूं की बिजाई के लिए खेत को तैयार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जो बेलर संचालक पराली की गाठें बनाकर जाता है, वही उठाने का काम करवाता है। दया सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार पराली की गांठें बनाने वालों को प्रोत्साहन राशि देने की योजना तो बनाए हुए हैं, लेकिन धरातल पर अभी और बहुत काम करने की जरूरत है। किसानों के खेतों में अगर फसल कटने के साथ ही पराली की गांठें बना दी जाएं और उनको हाथोंहाथ उठा लिया जाए तो फिर कोई किसान पराली में आग नहीं लगाएगा। प्रशासन को बेहतर तरीके से प्लानिंग करके काम करवाना होगा।