हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए बड़ी पहल करते हुए पिछले दस वर्षों में हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य जघन्य अपराधों में शामिल 10,892 अपराधियों का विस्तृत डाटाबेस तैयार किया है। विशेष आरजेएसएफ (रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद) यूनिट द्वारा तैयार किए गए इस डाटाबेस का उद्देश्य केवल अपराधियों का रिकॉर्ड रखना नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले अपराधों और गैंगस्टर गतिविधियों को पहले ही रोकना है। डाटाबेस में प्रत्येक अपराधी का आपराधिक इतिहास, वर्तमान गतिविधियां, संपर्क, सामाजिक पृष्ठभूमि, गैंग से संबंध और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की गई हैं। पुलिस ने इन अपराधियों को विभिन्न श्रेणियों में बांटकर उनके जोखिम स्तर का भी आकलन किया है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल रही है कि कौन अपराधी दोबारा अपराध कर सकता है और किन लोगों के संगठित गिरोहों से जुड़ने की संभावना अधिक है। आरजेएसएफ यूनिट की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गैंगस्टरों की नई भर्तियों पर रोक लगाना है। पुलिस के अनुसार कई गैंग छोटे अपराधियों, जमानत पर बाहर आए आरोपियों और आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास करते हैं। यूनिट ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है ताकि उन्हें गैंगस्टर गिरोहों का हिस्सा बनने से पहले ही चिन्हित किया जा सके। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि यह मॉडल पहले रोहतक में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था, जिसके अच्छे परिणाम मिलने पर इसे झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद में भी लागू किया गया। अब इसे अन्य जिलों तक विस्तारित करने की योजना है। बैठक में हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। एसटीएफ ने पिछले तीन वर्षों में 941 गैंग सदस्यों और अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा 22 वांछित गैंगस्टरों को विदेशों से भारत वापस लाया जा चुका है, जबकि 14 अन्य गैंगस्टर विदेशों में हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि अब फोकस केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर उन्हें पहले ही खत्म करने पर है। यही कारण है कि अपराधियों के डाटाबेस के साथ-साथ गैंगस्टरों की नई भर्तियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।