लोहारू के स्वर्ण जयंती पार्क में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका एवं समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य लोगों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर सावित्रीबाई फुले के शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के विचारों को याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरपालिका चेयरमैन प्रदीप बंटी तायल रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व पार्षद कन्हैयालाल सैनी ने की। इस अवसर पर उप-प्रधान प्रतिनिधि विपिन सैनी, पवन स्वामी एवं राजीव वत्स विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन रामसिंह सैनी द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि प्रदीप बंटी तायल ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई, जब महिलाओं को पढ़ाना सामाजिक अपराध माना जाता था। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी बालिकाओं एवं वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोले और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में सावित्रीबाई फुले के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं और हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में समानता एवं शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। कार्यक्रम अध्यक्ष कन्हैयालाल सैनी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का संपूर्ण जीवन संघर्ष, साहस और सेवा की मिसाल है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना और उसी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी युवाओं को प्रेरणा देते हैं।