दक्षिण भारत में स्विमिंग के लिए जिस तरह के संसाधन मौजूद हैं, उस तरह के संसाधनों की उत्तर भारत में कमी है। इसी वजह से यहां की स्वीमिंग की प्रतिभाएं सामने नहीं आ पा रही है। अगर दक्षिण भारत की तरह यहां भी खिलाड़ियों को संसाधन मिले तो निश्चित तौर पर स्विमिंग की प्रतिभाएं सामने आएंगी। प्रतिभाएं सामने आएंगी तभी देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिताओं में पहचान मिल सकेगी। यह मानना है लंदन में आयोजित 2012 ओलंपिक में प्रतिभाग करने वाले तैराक गगन उल्लामथ का। वह सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम के तरणताल में स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित तैयारी का टैलेंट हंट ट्रायल कराने गोरखपुर पहुंचे थे।