आस्था और विश्वास का संगम कहे जाने वाला बाबा निम्बेश्वर नाथ शिव मंदिर श्रद्धालुओं के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। गोरखपुर मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर ब्रम्हपुर ग्राम पंचायत में स्थित इस सिद्धपीठ पर दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और मान्यता है कि बाबा सभी की मुरादें पूरी करते हैं। चौरीचौरा से नई बाजार होते हुए मंदिर तक के लिए नियमित साधन उपलब्ध हैं। निजी वाहन से भी श्रद्धालु यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार कभी यहां घना नीम का जंगल और एक पवित्र तालाब हुआ करता था। तालाब के किनारे एक शिवलिंग स्थापित था। बहुत वर्ष पहले एक तपस्वी यहां आए और नीम के वृक्ष के नीचे रहकर केवल नीम की पत्तियां खाकर तपस्या करने लगे। लोगों ने उन्हें 'निम्ब ऋषि' कहा। इसके बाद तालाब का नाम 'निम्ब कुंड' और शिवलिंग का नाम 'निम्बेश्वर नाथ' पड़ा। कुछ समय बाद श्रद्धालुओं द्वारा भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर परिसर में स्थित निम्ब कुंड को लेकर विशेष आस्था है। कहा जाता है कि इसमें स्नान करने से कुष्ठ जैसे रोग दूर होते हैं। इसी विश्वास के चलते यहां वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।