ड्रोन के जरिए टीबी (क्षय रोग) के बलगम के नमूने जांच लैब तक पहुंचाने से जांच में लगने वाला समय 15 दिन से घटकर सिर्फ पांच दिन रह सकता है। इससे मरीजों का इलाज जल्दी शुरू होगा और उनका खर्च भी काफी कम होगा। यह दावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने किया है। यह अध्ययन आईसीएमआर के आई-ड्रोन कार्यक्रम के तहत तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले में किया गया। इसमें 840 लोगों को शामिल किया गया। इसमें 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 60 उप-स्वास्थ्य केंद्र और चार टीबी यूनिट को जोड़ा गया। मरीजों को दूर की लैब में जाने के बजाय अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही बलगम का नमूना देने की सुविधा मिली। अध्ययन के अनुसार, पारंपरिक व्यवस्था में टीबी जांच के लिए मरीजों का औसतन 9,451 रुपये तक खर्च होता था, जो ड्रोन व्यवस्था में घटकर करीब 91 रुपये रह गया। कई मरीजों को यात्रा पर कोई खर्च भी नहीं करना पड़ा। इससे मजदूरी का नुकसान भी कम हुआ। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि समय पर और सस्ती जांच टीबी उन्मूलन की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, मौसम, ड्रोन की क्षमता और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सही योजना के साथ यह तकनीक दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।