फर्जी कंपनी बनाकर जीएसटी धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह का दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में एक मास्टर माइंड समेत गिरोह के छह आरोपियों को दबोचा है। जांच के दौरान पता चला है कि महज एक कंपनी के जरिए ही 128 करोड़ की फर्जी लेनदेन दिखाकर सरकार को करोड़ों की चपत लगा दी गई। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी मास्टर माइंड राजकुमार दीक्षित (43), इसका सहयोगी वसुंधरा, गाजियाबाद निवासी विभाष कुमार मित्रा (34), मथुरा, यूपी निवासी अमर (35), दिल्ली निवासी नितिन वर्मा (43), मोहम्मद वसीम (30) और आबिद (35) के रूप में हुई है। मामले में एक मुख्य आरोपी दिलीप कुमार फरार है, उसकी तलाश जारी है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 51.12 लाख रुपये कैश, 15 मोबाइल फोन, दो कारें, कई लैपटॉप, नकली मुहरें, फर्जी जीएसटी बिल व अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस को 50 शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) का पता चला है। माना जा रहा इन कंपनियों के जरिए हजारों करोड़ की धोखाधड़ी कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है। आर्थिक अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रवि कुमार सिंह ने बताया कि जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में 24 मार्च 2026 को ईओउब्ल्यू थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। दरअसल कुछ लोगों ने जीएसटी विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर पीड़ित से उसके तमाम दस्तावेज ले लिए। इसके के बाद उसके पास आयकर विभाग का एक नोटिस पहुंचा। पीड़ित को पता चला कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर किसी ने आरके इंटरप्राइजेज के नाम से एक फर्जी कंपनी बनाकर उसमें 128 करोड़ की लेनदेन की है। इसके अलावा इस लेनदेन के बदले आरोपियों ने 10 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त भी कर लिया है। जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच शुरू की। पुलिस ने टेक्निकल जांच की। इसके अलावा ईमेल, बैंक डिटेल के आधार पर पड़ताल की। गहन जांच करने पर पता चला कि जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में दिलीप कुमार और राजकुमार दीक्षित नामक आरोपी मुख्य साजिशकर्ता हैं। अमर कुमार व विभाष कुमार मित्रा और नितिन वर्मा इनके सहयोगी है। वहीं वसीम और आबिद इनको बैंक अकाउंट व इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी उपबल्ध करवाते हैं।