श्रीकृष्ण की लीलाओं को बेशक साक्षात न देख सके हों, लेकिन हकीकत सा अनुभव कराना ही तो कलाकार का काम है। अगर कलाकार अपनी कला से सत्य और काल्पनिक दोनों के बीच की दूरियों को न मिटा पाए तो वो कलाकार कैसा। इसी भाव से जन्माष्टमी का उत्सव कला प्रेमियों के लिए भी बेहद खास रहा। शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर भक्ति और नृत्य की भावनाओं से सराबोर रहा। इसमें एक से बढ़कर एक ऐसी जीवंत प्रस्तुतियां दीं गई कि दर्शकों ने खुदको अगले दो घंटों तक ब्रज, मथुरा और गोकुल की भूमि में घूमता पाया। वहीं भारतीय संगीत सदन की ओर से पद्मभूषण कथक नृत्यांगना डॉ. उमा शर्मा और उनकी शिष्यों ने राम-श्याम नामक कथक और बृज-रास शैली की मनोहारी प्रस्तुति दी, जिसने इस अलौकिक पल को और भी जानदार बना दिया। हालांकि कार्यक्रम की शुरुआत रामायण के पंचवटी वर्णन से हुआ। इसके बाद एक के बाद एक श्रीकृष्ण की लीलाओं को प्रदर्शित किया जिसमें नृत्य रास में पूर्णिमा की रात गोपियों संग श्रीकृष्ण का दिव्य नृत्य, माखन चोरी लीला में बाल कृष्ण की चंचलता और शरारत, कालिया मर्दन लीला में यमुना को प्रदूषित करने वाले सर्प कालिया पर कृष्ण की विजय शक्ति और साहस का अद्भुत परिचय और गोवर्धन लीला में भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा का प्रसंग शामिल थे। वहीं मोर नृत्य युगल ने राधा और कृष्ण के प्रेम को मनमोहक रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें कृष्ण मोर का रूप धारण कर राधा संग आनंद में झूम उठे। संध्या का समापन महारास से हुआ, जहां भगवान कृष्ण ने अपने दिव्य स्वरूप को अनेक गुना कर प्रत्येक गोपी को अपने सान्निध्य का अनुभव कराया और प्रेम तथा भक्ति का चरम रूप मंच पर साकार हुआ। कथक की शास्त्रीयता, मधुर संगीत और आध्यात्मिक कथाओं का यह संगम दर्शकों के लिए अविस्मरणीय साबित हुआ। कार्यक्रम के बीच डॉ. उमा शर्मा की निर्मित लघु फिल्म श्री राधा का प्रदर्शन हुआ, जिसने श्रद्धा और प्रेम की भावनाओं को और गहराई दी। इस दौरान स्पिक मैके के संस्थापक डॉ. किरण सेठ, डीसीएम के चेयरमैन डॉ. विनय भारत राम और आईसीसीआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. सुरेश गोयल विशिष्ट अतिथियों के रूप में मौजूद रहे।