25 जून 1975 की वह रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में हमेशा याद की जाती है। आपातकाल की घोषणा के साथ ही देशभर में गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ और हजारों लोग इसकी चपेट में आए। 51 साल बाद भी उस दौर की यादें दिल्ली के प्रवीण कुमार गुलाटी के मन में ताजा हैं, जिनका पूरा परिवार आपातकाल की कार्रवाई का सामना करने वालों में शामिल था। प्रवीण कुमार गुलाटी बताते हैं कि उस समय वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने की तैयारी कर रहे थे। रोहतक में लगने वाला संघ का शिविर रद्द हो चुका था और देश का माहौल तेजी से बदल रहा था। इसी बीच उनका परिवार उनसे मिलने दिल्ली के रानी बाग पहुंचा। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह मुलाकात जेल की सलाखों तक पहुंच जाएगी।