जब कलाकार के सुरों को तबलों का साथ और दर्शकों की उत्सुकता भरी देखती आंखें मितली हैं तो वो संगीतमय शाम का अनुभव सिर्फ अनुभव न रहकर एक यादगार शाम बन जाती है। मंगलवार की शाम कमानी ऑडिटोरियम में कुछ ऐसा ही हुआ, जब ट्रिब्यूट टू द ट्रेडिशन नामक कार्यक्रम में गुरु पं कुंदनलाल गंगानी की स्मृति को सुरों की भेंट दी गई। कार्यक्रम में सुर, ताल और भाव एक साथ बह रहे थे। अमान अली बंगश के सरोद वादन ने सुरों से एक शांत, गूंजती हुई दुनिया रची, जिसमें तबला वादक श्रीशुभ महाराज और निशित गंगानी ने ताल का सधा साथ दिया। तबलों वादकों और सरोद वादक के बीच के रोमांचक द्वंद ने पूरे ऑडिटोरियम को संगीत की जादुई अनुभूति से भर दिया। मानों यहां स्वर, ताल और संगीत वादन का एक संगीतमय द्वंद छिड़ गया हो, जो जीतत दर्शक उसकी ओर देख तालियां बजातें। एक तरफ संगीत से कलाकारों ने जयपुर घराने की परंपरा को सुरों की सेज पर सजाया, तो वहीं दूसरी तरफ तबला वादक फतेह सिंह की गंगानी की ताल पर नर्तक राजेंद्र गंगानी की कथक प्रस्तुति ने दर्शकों को खूब उत्साहित किया। दर्शकों ने हर एक मुद्रा को तालियों से नवाजा। ऑडिटोरियम में दर्शकों की भीड़ बयां कर रही थी, कि जयपुर घराने की कला लोगों को अपनी ओर खींचने में माहिर है। इससे यह बात साफ हो गई कि आज के युग में भी शास्त्रीय संगीत की लौ लोगों के हृदय में जलती है। इस दौरान पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली खान को पं कुंदनलाल गंगानी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं नीति आयोग से बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे डॉ. विनोद पॉल ने गुरु के योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।