बप्पा इस बार केवल घरों में नहीं, दिलों में भी आ रहे हैं। भक्ति के संग जिम्मेदारी की आवाज गूंज रही है क्योंकि, आस्था की डोर अब पर्यावरण से भी जुड़ रही है। बाजारों में जहां पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस की चमकदार मूर्तियां बिकती थीं, वहीं इस बार मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं लोगों की पहली पसंद बन गई हैं। गणेश चतुर्थी पर इस बार श्रद्धा के संग एक नई सोच जुड़ी है, पर्यावरण की रक्षा। पहले जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां यमुना और अन्य नदियों में विसर्जन से प्रदूषण बढ़ाती थीं, वहीं इस बार बाजारों में घुलनशील और मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा है। मूर्तिकारों के अनुसार, मिट्टी की मूर्तियों का रख-रखाव कठिन जरूर है, बारिश से बचाना पड़ता है और संभालना भी नाजुक होता है। फिर भी वे खुश हैं क्योंकि इनसे पर्यावरण को कोई हानि नहीं।