नूंह जिले की 17 लाख आबादी के लिए उम्मीदों की किरण बनकर खड़ा हुआ 700 करोड़ रुपये की लागत से बना मेडिकल कॉलेज आज खुद ही बदहाली के आंसू बहा रहा है। साल 2012 में जब यह कॉलेज शुरू हुआ था, तब लोगों को भरोसा था कि अब इलाज के लिए दिल्ली, गुरुग्राम या जयपुर की दौड़ खत्म होगी। लेकिन 14 साल बाद भी हालात ऐसे हैं कि यहां आने वाला हर मरीज सुविधा के बजाय मजबूरी लेकर लौटता है। कभी दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है तो कभी जांच के लिए निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।