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खेतों से मैट तक: किसान परिवारों के चार बेटों ने मेहनत से UPKL Season 2 में बनाई पहचान, जानिए क्या कहा

सुबह की ठंडी हवा में खेतों की मेड़ पर दौड़ना, स्कूल की छुट्टी के बाद मिट्टी के मैदान में कबड्डी खेलना और गांव के बड़े खिलाड़ियों को खेलते हुए देखना, यही वह शुरुआत थी, जिसने आज किसान परिवारों के चार बेटों को उत्तर प्रदेश कबड्डी लीग (यूपीकेएल) सीजन-2 जैसे बड़े मंच तक पहुंचा दिया। कभी संसाधनों की कमी, कभी आर्थिक मजबूरियां, लेकिन जुनून और मेहनत ने इन युवाओं को पीछे मुड़कर देखने नहीं दिया। खिलाड़ियो ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने मेहनत और कड़ी तैयारी के बाद इस टीम में अपनी जगह बनाई। परिवार में पिता के साथ बचपन से खेतो में पसीना बहाने के बाद जब कबड्डी खेलने के लिए मैदान में जाते थे तो ताकत, फुर्ती और आत्मविश्वास बढ़ता था। इनमें से उत्तर प्रदेश कबड्डी लीग (यूपीकेएल) सीजन-2 में अवध रामदूत टीम तक पहुंचने वाले चार खिलाड़ी विशाल यादव, नमन चौधरी, दिव्यांशु गुज्जर और संदीप कुमार वर्मा, ऐसी ही प्रेरक कहानी के नायक हैं। ये सभी खिलाड़ी किसान परिवारों से आते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखा। इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे जेडी नोएडा अकादमी की अहम भूमिका रही। अकादमी के कोच और मालिक जितेंद्र नागर बताते हैं कि जेडी अकादमी के खिलाड़ी यूपीकेएल की लगभग सभी टीमों में हैं। हम रोजाना ढाई घंटे सुबह और तीन घंटे शाम अभ्यास कराते हैं। इसमें शारीरिक फिटनेस, रनिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मानसिक मजबूती और रिकवरी गेम्स शामिल हैं। वहीं ट्रेनिंग में मानसिक मजबूती, फिटनेस, रनिंग, वर्कआउट, रिकवरी गेम्स और फिजिकल एक्टिविटी पर खास ध्यान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अकादमी से करीब 47 खिलाड़ी यूपीकेएल सीजन-2 में चयनित हुए हैं। गांव से निकलकर स्टेडियम तक का यह सफर साबित करता है कि संसाधनों की कमी सपनों को नहीं रोक सकती। सही मार्गदर्शन, अनुशासन और अथक मेहनत से किसान परिवारों के बेटे भी प्रोफेशनल खेलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। स्कूल टाइम में गांव में कबड्डी देखते-देखते खेलने का मन हुआ। पहले जिला, फिर मंडल स्तर पर खेले और आज यूपीकेएल में उतरना सपना पूरा होने जैसा है। - विशाल यादव हमारे पास महंगे जूते या किट नहीं थे, लेकिन हौसला था। गांव के मैदान ने हमें मजबूत बनाया। - नमन चौधरी पढ़ाई के साथ अभ्यास आसान नहीं था, मगर परिवार और कोच का भरोसा हमारे साथ रहा। - दिव्यांश गुर्जर मैं किसान का बेटा हूं। खेत में काम और शाम को प्रैक्टिस यही दिनचर्या रही। आज लीग में खेलना गर्व की बात है।- संदीप कुमार वर्मा (गांव सिकटा, सिद्धार्थनगर)

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