साइबर अपराध से पीड़ित लोगों को ठगी के खाते में होल्ड रकम वापस दिलाने के गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन गौतमबुद्धनगर व जिला न्यायालय के साथ मिलकर पहल की है। इसके तहत 27 अधिवक्ता ठगी का शिकार लोगों को रकम वापस दिलाने में निशुल्क विधिक सहायता में मदद करेंगे। साइबर ठगी के शिकार समय पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी भटकते रहते हैं। कई बार देखने में आता है कि उन्हें संबंधित कोर्ट से बैंक खाते में फ्रीज रकम पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। ऐसे लोगों को राहत दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। जिनकी बैंक खातों की धनराशि साइबर अपराधों के चलते होल्ड व फ्रीज (लीन) है। इस पहल के तहत न केवल पीड़ितों को न्यायिक माध्यम से उनकी धनराशि वापस दिलाई जाएगी। बल्कि उन्हें निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने अधिवक्ता संघ गौतमबुद्धनगर और जिला न्यायालय से समन्वय स्थापित किया गया है। परिणामस्वरूप, अधिवक्ता संघ द्वारा 27 अधिवक्ताओं की एक सूची तैयार की गई है। जिन्होंने इस सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्य के लिए निशुल्क सेवाएं देने की सहमति दी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में लीन की गई राशि बहुत अधिक नहीं होती। जबकि उसे छुड़वाने के लिए अधिवक्ताओं की फीस अधिक होने के कारण पीड़ित व्यक्ति न्यायिक सहायता नहीं ले पाता। यही कारण है कि बड़ी संख्या में पीड़ित वर्षों से अपनी छोटी-छोटी धनराशी को पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में पुलिस की यह पहल पीड़ितों के लिए नई उम्मीद बन सकती है। इससे पीड़ितों को उनकी धनराशि वापस मिल पाएगी। बल्कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो सकेगा। इससे साइबर अपराध नियंत्रण की दिशा में भी प्रभावी प्रगति होगी। पुलिस अब लीन धनराशि वापसी के लिए पीड़ितों से संपर्क कर रही है। साइबर सुरक्षा और जागरूकता के लिए औद्योगिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, आरडब्ल्यूए, एओए एवं सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म्स के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह का कहना है कि यह प्रयास केवल एक न्यायिक सहायता नहीं है, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। जिसके माध्यम से पीड़ितों को उनका अधिकार दिला रहे हैं और सिस्टम में विश्वास बहाल कर रहे हैं। वहीं जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के सचिव अजीत नागर का कहना है कि पुलिस की ओर से अधिवक्ताओं की सूची मांगी गई थी। वह उन्हें सौंप दी गई थी। पीड़ितों को समय पर विधिक सहायता के साथ ठगी की रकम वापस मिले इसके प्रयाग रहेंगे।