गुरुग्र्राम केे मानेसर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी इन दिनों बिजली संबंधित दिक्कतों से परेशान हैं। उद्यमियों की शिकायत है कि इससे उद्योगों का उत्पादन काफी प्रभावित हो रहा है। यहां के करीब 3000 उद्यमी बिजली के साथ अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधित परेशानियों से भी जूझ रहे हैं। बृहस्पतिवार को मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के साथ आयोजित संवाद में उद्यमियों ने इन दिनों आ रहे बिजली संकट और अन्य समस्याओं पर चर्चा की। उद्यमियों ने बताया कि बिजली निगम स्थानीय ट्रांसफार्मर, एलटी पैनल, आरएमयू आदि लचर हैं। पूरे दो हजार एकड़ के औद्योगिक इलाके में एक वक्त महज तीन लाइनमैन उपलब्ध होते हैं। जबकि बिजली संबंधित कई तरह की दिक्कतें आती है। वोल्टेज का उतार चढ़ाव बहुत ज्यादा है। बिजली की आवाजाही से औद्योगिक इकाईयों का उत्पादन बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। कामगारों को वेतन, जीएसटी जैसे चार्जेज कम नहीं होते। जबकि इस समस्या का हल सरकार बहुत आसानी से निकाल सकती है। मानेसर में अधिसंख्य एमएसएमई हैं। प्रधानमंत्री इसे आगे बढ़ाने की बात करते हैं मगर इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधित दिक्कतें उद्योगों को पीछे धकेल रही है। उद्यमियों ने कहा कि एनजीटी के नियमों के अनुसार वे सामान्य जेनरेटर भी नहीं चला सकते। सीएनजी वाले जेनसेट में करोड़ों का खर्च है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को इस तरह बार-बार बिजली की आवाजाही का संकट नहीं झेलना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में लॉ एंड आर्डर की स्थिति भी सुधरी है। इससे हरियाणा सरकार को सीखना चाहिए। मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। बिजली संकट के साथ-साथ खराब सड़कें, जल भराव, सुरक्षा जैसे कई अन्य मुद्दे भी मानेसर औद्योगिक इलाके में हैं। खेड़की दौला टोल लंबे समय से नहीं हटाया गया है। यहां एक और सड़क आती है, जो खस्ताहाल है। कार्यक्रम में संगठन के महासचिव विकास गुप्ता, उपाध्यक्ष सुमन चावला, संयुक्त सचिव विनोद अग्रवाल, संयुक्त सचिव आशु झिंगन, कार्यकारिणी सदस्य संजीव कपूर और एसपी कांबोज ने अपनी बात रखी।