गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) बसई पक्षी क्षेत्र एवं बायोडायवर्सिटी क्षेत्र में मानसून के दौरान समेकित जैव विविधता आकलन करा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पक्षियों की गणना करना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कर मेट्रो परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल विकसित करना है। जीएमआरएल के अनुसार, बसई क्षेत्र को बर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने महत्वपूर्ण बसई पक्षी क्षेत्र (आईबीए) और साल 2004 में इस एरिया को बायोडायवर्सिटी (केबीए) के रूप में मान्यता दी गई थी। यह एक गतिशील आर्द्रभूमि है, जिसकी पारिस्थितिक विशेषताएं मौसम के साथ बदलती रहती हैं। मानसून में यहां वर्षा जल भरने, जलीय वनस्पतियों के विकास और स्थानीय पक्षियों के घोंसले बनाने की प्रक्रिया तेज होती है। जबकि, सर्दियों में पर्याप्त जल और भोजन उपलब्ध होने पर बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक महत्व का आकलन केवल एक बार की पक्षी गणना से नहीं किया जा सकता। अब स्वतंत्र विशेषज्ञों, पक्षी विशेषज्ञों, पारिस्थितिकीविदों और स्थानीय हितधारकों की भागीदारी से किए जा रहे इस समेकित जैव विविधता अध्ययन में पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्यांकन किया जाएगा। अध्ययन के आधार पर मेट्रो परियोजना के निर्माण और संचालन से संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसमें पक्षी-अनुकूल और पर्यावरण-संवेदनशील डिजाइन संबंधी सुझाव भी तैयार किए जाएंगे। बता दें कि मेट्रो परियोजना के पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर नौ तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी चरण में बसई से सेक्टर 101 तक मेट्रो संचालन के लिए एक स्पर का निर्माण किया जाना है। इसी एरिया में बसई पक्षी क्षेत्र और बायोडायवर्सिटी आता है।