लच्छीवाला वन रेंज के कुआंवाला जंगल में का सन्नाटा एक नन्हीं सी आहट से टूटा, जब झुंड से बिछड़ा एक हाथी का बच्चा वन कर्मचारियों को भटकता मिला था। डरा-सहमे से हाथी के बच्चे को वनकर्मियों की गोद मिली। काफी तलाश करने के बाद जब झुंड नहीं मिला तो सुरक्षित चीला रेंज में भिजवा दिया। लच्छीवाला वन रेंज की कुआंवाला चौकी के पीछे आरक्षित वन क्षेत्र में वनकर्मियों को 17 अप्रैल 7.30 बजे हाथी का बच्चा मिला था। झुंड और उसकी मां तक उसे पहुंचाने में वन विभाग ने 24 घंटे जंगल में लगातार निगरानी और निरीक्षण के लिए रखा गया। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने नन्हें हाथी को वन्यजीव की तरह नहीं, बल्कि एक मासूम मेहमान की तरह अपनाया। दो दिनों तक चले सघन सर्च ऑपरेशन में ड्रोन से जंगल के कोने-कोने को खंगाला गया, ताकि नन्हें हाथी को उसके परिवार से मिलाया जा सके। कोशिश नाकाम रही तो इंसानियत ने कोमल रूप दिया। प्रभाागीय वन अधिकारी देहरादून के दिशा निर्देशन और पशु चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में नन्हें को कभी जंगल की छांव में रखा गया तो कभी रेंज परिसर में संभालकर रखा गया। समय पर दूध पिलाया तो, तो गर्मी को देखते हुए समय- समय पर पानी दिया गया। शावक की हर हरकत पर वन विभाग की टीम ने ऐसे नजर रखी जैसे मां अपने बच्चे पर रखती है। झुंड नहीं मिलने की राह जब धुंधली पड़ी तो वन विभाग ने उसके सुरक्षित भविष्य को प्राथमिकता दी। इसके बाद बेहतर संरक्षण और देखभाल के लिए 19 अप्रैल की रात को चीला रेंज में भिजवाया गया। प्रभागीय वन अधिकारी के दिशा निर्देशों के आधार पर हाथी के बच्चे के झुंड को तलाशने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। वन विभाग ने नन्हें जीव को अपनापन दिया। चीला रेंज में नन्हें हाथी को सुरक्षित भिजवा दिया गया है। मेधावी कीर्ति, वन क्षेत्राधिकारी, लच्छीवाला।