शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज से हो गई है। कालसी स्थित सिद्ध पीठ महाकाली मंदिर मे सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे है। भक्तों ने मां काली के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। देहरादून से चकराता मार्ग पर कालसी में अमलावा नदी के तट पर मां काली का प्राचीन मंदिर है। जहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते है। उत्तराखंड से ही नहीं अपितु अन्य प्रदेश के भक्त भी यहां दर्शन के लिए आते है। सिद्धपीठ महाकाली मंदिर के पुजारी आचार्य भरत भूषण शर्मा ने बताया कि यह मंदिर द्वापर कालीन माना जाता है। जब पांडव लाखामंडल में जा रहे थे तो वे इस स्थान पर रुके और यहां पर स्थित एक गुफा से लाखामंडल के लिए प्रस्थान करने लगे तो उन्हें यहां पर मां काली ने प्रकट हो कर उन्हें दर्शन दिए और पांडवों ने मां काली की आराधना की। मां काली ने उन्हें किसी भी संकट से बचने के लिए आशीर्वाद दिया। मां के आशीर्वाद से ही वे कौरवों और शकुनी मामा की लाखामंडल स्थित महल में उनको मारने की साजिश से बचे। जब पांडव महाभारत काल में स्वर्गारोहण के लिए गए तो वे यमुनोत्री मंदिर में दर्शन करने से पूर्व कालसी के काली मंदिर में आए और उन्होंने यहां पर पूजा अर्चना की। उसके बाद स्वर्गारोहण के लिए प्रस्थान किया। यह काली मां की स्वयंभू सिद्ध पीठ है।