कोंडागांव। जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बम्हनी में स्थित प्राचीन शिव मंदिर आज भी अपने गौरवशाली अतीत की गवाही दे रहा है। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 12वीं शताब्दी का है। हजारों वर्ष पुराना यह धरोहर स्थल वर्तमान में उपेक्षा का शिकार बना हुआ है, जबकि इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता बेहद खास मानी जाती है।
जानकारों के अनुसार पुरातत्व विभाग द्वारा भी यहां मौजूद मंदिर संरचना और आसपास बिखरे पाषाण अवशेषों को अत्यंत प्राचीन बताया जा चुका है। मंदिर परिसर में फैले शिलाखंड, टूटी प्रतिमाएं और नक्काशीदार पत्थर इसकी समृद्ध स्थापत्य परंपरा की ओर इशारा करते हैं। बावजूद इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आती।
इस मंदिर की विशेषता इसकी पाषाण कला है, जो बस्तर अंचल के प्रसिद्ध बारसूर मंदिर समूह और नारायणपाल मंदिर की स्थापत्य शैली से साम्यता रखती है। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि संभवतः इसका निर्माण नल वंश के शासकों के काल में हुआ होगा।
हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का दर्शन करते हैं। पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का वातावरण देखने को मिलता है। मंदिर बम्हनी से चारगांव जाने वाले मार्ग पर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित है और यहां तक पहुंचना सुगम है। इस महाशिवरात्रि इतिहास, आस्था और प्राचीन धरोहर के अद्भुत संगम को देखने श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच सकते हैं।