राजनांदगांव में गुरु नानक चौक से निकली बाबा महाकाल की भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में भक्त शामिल हुए। इस यात्रा में हरियाणा के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत अघोरी नृत्य और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्य आकर्षण का केंद्र रहे। डीजे और भक्ति गीतों के साथ पूरा शहर भक्तिमय हो गया।
संस्कारधानी महाकाल मित्र मंडल द्वारा आयोजित यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकली, जिसमें आकर्षक झांकियां, डीजे, धुमाल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का संगम देखने को मिला। हरियाणा के अघोरी कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके साथ ही, उड़ीसा और मध्य प्रदेश के पारंपरिक वाद्य यंत्रों और छत्तीसगढ़ के प्रमुख नृत्यों ने भी समां बांधा।
आयोजन समिति के अध्यक्ष निखिल द्विवेदी ने बताया कि पिछले सात वर्षों से यह शोभायात्रा निकाली जा रही है। इसका उद्देश्य उन भक्तों को बाबा महाकाल के दर्शन कराना है, जो प्रत्यक्ष रूप से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पाते। इस वर्ष भी यात्रा में भव्य झांकियां सजाई गईं और हजारों भक्तों ने इसमें भाग लेकर पुण्य लाभ कमाया। अघोरी नृत्य, विभिन्न राज्यों के वाद्य यंत्रों और छत्तीसगढ़ी गाजे-बाजे के साथ यह शोभायात्रा एक अनूठा संगम प्रस्तुत करती है।
अघोरियों की मनमोहक प्रस्तुति
हरियाणा से आए अघोरी कलाकारों ने अपनी विलक्षण नृत्य शैली से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके वेशभूषा और नृत्य की अनूठी भंगिमाओं ने दर्शकों में विशेष उत्साह भरा। यह प्रस्तुति शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण बनी, जिसने भक्तों को एक अलग आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया।
विविधता में एकता का संगम
शोभायात्रा में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नृत्यों का समावेश इस बात का प्रतीक था कि कैसे विभिन्न संस्कृतियां एक होकर भक्ति के एक सूत्र में बंध सकती हैं। उड़ीसा और मध्य प्रदेश के वाद्य यंत्रों के साथ छत्तीसगढ़ के स्थानीय संगीत और नृत्य का समन्वय एक अनूठी सांस्कृतिक छटा बिखेर रहा था।