महासमुंद जिले में खनिज संपदा से प्राप्त होने वाली जनहित की राशि (DMF फंड) के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘गढ़कलेवा’ को बंद कर वहां ‘पालना घर’ विकसित करने के नाम पर लगभग 10 लाख रुपये की राशि में भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व पार्षद पंकज साहू की शिकायत के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायत के अनुसार, तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर गढ़कलेवा को विस्थापित कर पालना केंद्र बनाया गया। इसके लिए डीएमएप फंड से 9,99,133 रुपये की राशि स्वीकृत की गई। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्कालीन अधिकारी ने स्वयं के नाम पर 32,500 रुपये का भुगतान लिया। वहीं, जिला बाल संरक्षण अधिकारी के नाम पर 75,000 रुपये और 94,069 रुपये के अग्रिम चेक व आरटीजीएस के माध्यम से आहरण किया गया। सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) को सप्लायर की भूमिका में दिखाया गया है। पीडब्ल्यूडी के माध्यम से एयर कंडीशनर, सीसीटीवी और बिजली के सामानों की सप्लाई दिखाकर 2,65,590 रुपये का भुगतान प्राप्त किया गया। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि एक ही आकार (32 इंच) की LED टीवी अलग-अलग वेंडरों से अलग-अलग कीमतों पर खरीदी गई। दाऊ अप्लायंसेज से जहां टीवी 19,200 रुपये में ली गई, वहीं एक अन्य स्थानीय स्तर पर गैर-ब्रांडेड टीवी के लिए 35,714 रुपये का भुगतान किया गया। लगभग 10 लाख रुपये के इस कार्य में किसी भी प्रकार के टेंडर या भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया। किचन सामग्री, फर्नीचर और सजावट के नाम पर मनमाने तरीके से बिल लगाकर शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाई गई। सामाजिक कार्यकर्ता पंकज साहू ने बताया कि DMF फंड के करोड़ों रुपये का इसी तरह दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत न्यायालय में मामला दर्ज कराने की बात कही है। वहीं, मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि पालना घर के संदर्भ में खरीद को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती गई है। विभाग का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराई गई है और इस संबंध में जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा जाएगा।