जिले में पिछले तीन दिनों के भीतर कुत्तों के काटने के 18 मामले सामने आए हैं। इस स्थिति से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। विभिन्न क्षेत्रों से पीड़ित उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचे हैं।
चिकित्सकों ने सभी मरीजों का प्राथमिक उपचार किया है। उन्हें आवश्यक रेबीज रोधी टीके भी लगाए गए हैं। अधिकांश मरीजों की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें घर भेज दिया गया। उन्हें निर्धारित खुराक के अनुसार आगे उपचार की सलाह दी गई है। हालांकि, दो लोगों का इलाज अभी भी जिला अस्पताल में भर्ती करके किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने की घटना को नजरअंदाज न करें। रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसका समय पर इलाज और टीकाकरण ही एकमात्र प्रभावी उपाय है।
अस्पताल प्रबंधन ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित झाड़-फूंक और अन्य अंधविश्वासों से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने का इलाज केवल चिकित्सकीय पद्धति से ही संभव है। कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर उपचार कराना चाहिए।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिनों में 18 लोगों को कुत्तों ने काटा है। इन प्रभावितों में दो वर्ष की मायोशा से लेकर 60 वर्ष के मूलचंद तक विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल हैं। लोकेश, आर्यन, श्रेयांश, रचित, खुमा श्याम, जयदीप, जगत, सुखीलाल, श्वेता, रोशनी, अमन, बबीता, रॉकी, मधु और राकेश भी इस सूची में हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से जागरूक रहने और किसी भी पशु के काटने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।