अक्षय तृतीया का पर्व आने वाला है और इस दिन सैंकड़ों जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे और यहीं वो दिन है। जब सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले सामने आए हैं। ऐसे में अब प्रशासन भी अक्षय तृतीया को लेकर अलर्ट पर है। जिसके लिए विशेष टीम जिले में बनाई गई है। वहीं जिलेभर के महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी घोषित किया गया है। वहीं सचिव भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की भूमिका में होंगे। तो प्रशासन ने कमर कस ली है। जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए विभाग काम कर रहा है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह को रोकने के लिए हम ग्रामीण स्तर तक पहुंच चुके हैं और यहां पर सरपंच सचिवों को पत्र लिखा गया है। वह यदि किसी भी प्रकार का विवाह होते हैं जो अपने स्तर पर उम्र का वेरिफिकेशन करेंगे और उसकी जानकारी जिला महिला एवं बाल विकास विभाग को भेजेंगे। वहीं गांव में मुनादी भी कराई जा रही है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने बताया कि गांव में सबसे ज्यादा शादियां होती हैं और इस दिन शुभ मुहूर्त होते हैं तो हमने अपना सूचना तंत्र इतना प्रभावशाली रखा है कि हम इसे रोक पाने में सफल होंगे। पंडित संतोष तिवारी झलमला वाले ने बताया कि अक्षय तृतीया पर विवाह करना बहुत शुभ माना जाता है। क्योंकि यह एक अबूझ मुहूर्त है और इस दिन किए गए कार्यों का अक्षय फल मिलता है। मान्यता है कि इस दिन विवाह करने से जीवन भर साथ रहने का वरदान मिलता है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और अक्षय तृतीया को त्रेता युग की शुरुआत का दिन भी माना जाता है, जब भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया था। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनर्मिलन भी हुआ था। इन धार्मिक मान्यताओं के कारण अक्षय तृतीया विवाह के लिए एक विशेष दिन बन गई है। इसलिए इस दिन सबसे ज्यादा विवाह होते हैं। इससे शुभ और कोई मुहूर्त नहीं होता।