गेहूं के निर्यात को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं और उससे जुड़े विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। अब भारत से ड्यूरम समेत सभी तरह के गेहूं का निर्यात किया जा सकेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद गेहूं की निर्यात नीति को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी से हटाकर ‘मुक्त’ श्रेणी में डाल दिया गया है। यानी अब गेहूं के निर्यात के लिए पहले जैसी पाबंदियां लागू नहीं रहेंगी। इस फैसले को किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों के लिए अहम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि गेहूं से बने कई उत्पादों के निर्यात को भी सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब गेहूं के आटे के साथ-साथ मैदा और सूजी का निर्यात भी ‘मुक्त’ श्रेणी में होगा। इससे भारतीय गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार के इस फैसले का सीधा असर कृषि निर्यात पर देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजार में भारतीय गेहूं उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और निर्यातकों को नए बाजार तलाशने का मौका मिलेगा। वहीं, घरेलू किसानों के लिए भी यह फैसला अहम है, क्योंकि निर्यात के रास्ते खुलने से बाजार में मांग बढ़ने और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, गेहूं निर्यात को लेकर सरकार का रुख पहले पूरी तरह खुला नहीं था। फरवरी में सरकार ने कुछ विशेष शर्तों के साथ गेहूं की सीमित खेपों के निर्यात की अनुमति दी थी। उस समय निर्यात केवल निर्धारित परिस्थितियों और सीमित मात्रा में ही किया जा सकता था।
अब केंद्र सरकार ने उस सीमित छूट से आगे बढ़ते हुए गेहूं के निर्यात पर लगी पाबंदी को पूरी तरह हटा दिया है। सरकार के इस कदम से भारतीय गेहूं उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ सकती है और कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबार को भी गति मिल सकती है।
कुल मिलाकर, गेहूं निर्यात को ‘मुक्त’ श्रेणी में लाने का फैसला किसानों, निर्यातकों और कृषि कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग कितनी बढ़ती है और इसका फायदा घरेलू बाजार और किसानों तक किस तरह पहुंचता है।