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विकास ऐसा हो जिसका स्वास्थ्य और पर्यावरण पर ना पड़े असर

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पिथौरागढ़ के मेलडुंगरी में आयोजित कार्यशाला में मौजूद लोग। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। मेलडुंगरी में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान और निवोद पर्यावरण शोध संस्थान की ओर से तीन दिवसीय सांइस मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें हरित क्रांति, जैविक खेती, पर्यावरण स्वच्छता, पेयजल स्वच्छता, संचार, व्यक्तित्व विकास, ऊर्जा संरक्षण सहित कई अन्य विषयों पर चर्चा की गई।
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कार्यशाला में रोज ग्रीन मीडिया और ग्रीन साइंस पर जानकारी देते हुए रिसोर्स पर्सन दिनेश पंत ने कहा कि हरित विज्ञान के जरिये जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति हरी है इसलिए सुंदर है। प्रकृति हमें ऑक्सीजन, पानी, हवा सब निशुल्क उपलब्ध कराती है। हमें प्रकृति से सीखना चाहिए। जल, ऊर्जा, जमीन, हवा, भोजन, वर्तमान पीढ़ी के साथ भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता है। सुषमा भट्ट ने जैविक खेती के फायदे और रसायनिक खेती से हो रहे नुकसान की जानकारी दी। भुवन पंत ने प्रतिभागियों को घरेलू पर्यावरण, स्वच्छता, मानव स्वास्थ्य आदि विषयों की जानकारी दी। राजेश शुक्ला ने साइंस मीडिया वर्कशाप के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि हरित विज्ञान और मीडिया काफी रुचिकर विषय हैं। सतत विकास के एजेंडे में इसका बेहतर प्रयोग करना चाहिए। ब्लाक समन्वयक चंद्रशेखर भट्ट ने कहा कि अपशिष्ट पदार्थों की रोकथाम में हरित विज्ञान की बड़ी भूमिका है। विकास ऐसा हो जिसका स्वास्थ्य और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। (संवाद)
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