रामलीला की निकली झांकी।
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गोस्वामी तुलसीदास ने संगीतमय स्वरूप में रामलीला की शुरुआत की। इसके बाद उनके मित्र व मुंहबोले बड़े भाई मेघा भगत ने झांकियों की लीला शुरू की। तुलसीघाट पर गोस्वामी तुलसीदास ने रामलीला की शुरुआत लगभग 1590 में की थी।
संकल्प और मुकुट पूजन से होता है रामलीला का आरंभ
रामलीला के अनुष्ठान का आरंभ संकल्प और मुकुट पूजन से होता है। लीला समितियां अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित अवधि तक लीला का आयोजन करती हैं। यह अवधि पांच से 35 दिन तक होती है। रामलीला में तीन प्रमुख शैलियां मिलती हैं। झांकी लीला, तुलसी लीला और घटित लीला। झांकी लीला वैष्णव पद्धति की लीला है। तुलसी लीला गोस्वामी तुलसीदास द्वारा आरंभ की गई। घटित लीला का स्वरूप रामनगर में देखा जा सकता है।
रामनगर की रामलीला (फाइल)
काशी की रामलीलाएं सचल होती हैं। रोजाना अलग-अलग स्थानों पर लीला का मंचन होता है। कई स्थान तो लीला स्थल के नाम से ही प्रसिद्ध हैं। रामनगर का मंच विशाल है जो लगभग 20 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। चित्रकूट लीला में कोई विशेष मंच विधान नहीं होता है। तुलसी लीला में मंच विधान को नहीं अपनाया जाता, लेकिन शिवपुर रामलीला में मंच के दर्शन होते हैं।