सिविल जज सीनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट युगल शंभू की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के मूल वाद की सुनवाई हुई। संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर में एएसआई के अतिरिक्त सर्वे से संबंधित अर्जी के विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी बहस पूरी कर ली। अब इस मामले में 10 अक्तूबर को लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी अपनी दलील प्रस्तुत करेंगे।
मसाजिद कमेटी की ओर से कहा गया कि ज्ञानवापी स्थित वजूखाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एएसआई ने शपथ पत्र दिया था कि ज्ञानवापी में खोदाई कर मौजूदा ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इसके बाद एएसआई ने गत वर्ष सर्वे किया था।
वाद मित्र का यह कथन कि चार खोदाई कर सर्वे किया जाए, सही नहीं है। अगर एएसआई की टीम को जीपीआर पद्धति से जमीन के नीचे कुछ होने के संकेत मिलते तो वह कोर्ट में अर्जी देकर खोदाई या अन्य वैज्ञानिक तरीके से सर्वे करने की अनुमति जरूर लेते। एएसआई ने पूरा सर्वे कर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दिया है। सर्वे के दौरान मिले अवशेष, वस्तु, मूर्तियां और अन्य सामग्रियां कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन की देखरेख में रखी गई हैं।
एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अभी सुनवाई ही नहीं हुई है तो अतिरिक्त सर्वे की आवश्यकता क्या है। ऐसे में अतिरिक्त सर्वे की मांग से संबंधित अर्जी खारिज होने योग्य है। इससे पहले वाद मित्र और फिर सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से बहस की गई थी। मंगलवार को मसाजिद कमेटी की ओर से भी बहस पूरी कर ली गई।