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प्री-बजट: आयकर टैक्स स्लैब में हो बदलाव, इज ऑफ डूइंग बिजनेस ले आकार; उद्यमियों और कर विशेषज्ञों ने रखे विचार

Sun, 21 Jul 2024 06:45 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: बजट को लेकर बनारस के उद्यमियों और कर विशेषज्ञों ने अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार रखें। इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से मिल रही सुविधाओं पर सवाल उठाया। इस पर कई सुझाव भी दिए।
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अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकार की ओर से एमएसएमई सेक्टर का नाम तो कई बार लिया गया, लेकिन उस तरह की सुविधाएं धरातल पर एमएसएमई सेक्टर को नहीं मिल सकीं। जीएसटी में तमाम विसंगतियां और नित नए बदलाव से उद्यमियों और व्यापारियों की ऊर्जा जाया हो रही है। छोटे और बड़े उद्योगों के लिए अलग टैक्स की मांग पर कोई सहमति नहीं बन सकी है। 

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आयकर के स्लैब में पिछले दस वर्षों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इज ऑफ डूइंग बिजनेस वास्तव में होना चाहिए। यह बातें उद्यमियों और कर विशेषज्ञों, मोटर डीलरों ने शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित प्री-बजट पर संवाद में कहीं।

सुनें इनकी
जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया आयकर की तरह पारदर्शी बनाने की जरूरत है, जितनी असमानताएं जीएसटी को लेकर है उन्हें दूर किया जाए। बेवजह नोटिस भेज उद्यमियों का उत्पीड़न बंद हो। प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप एमएसएमई की भी कंपनी की तरह आयकर की दरें निर्धारित की जाए। - राजेश भाटिया, अध्यक्ष, एसआईए

हाइब्रिड ड्यूल फ्यूल वाहनों पर कोई छूट नहीं है। ई-व्हीकल्स की भी बिक्री उतनी नहीं है, क्योंकि उस हिसाब से अपने यहां चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था नहीं है। ग्राहकों से हम दो लाख से अधिक नकदी ले नहीं सकते हैं। इफ ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। - राजीव गुप्ता, अध्यक्ष, वाराणसी ऑटो मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन

चार नए श्रम कानून बने, लेकिन लागू नहीं किया गया। 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में लगे 50 श्रमिकाें तक के सूक्ष्म, लघु उद्योगों के लिए श्रम कानून सरल किए जाएं। स्किल्ड कर्मचारियों की बहुत कमी है। श्रमिकों की मजदूरी उत्पादकता के सापेक्ष तय हो। साथ ही तकनीकी उन्नयन मंत्रालय बनाना चाहिए। - नीरज पारिक, महासचिव, एसआईए

छोटे व्यापारियों को लोन देने में बैंकों की ओर से आनाकानी होती है। ऐसे बैंकों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। जीएसटी के सरलीकरण नहीं होने से उद्यमियों को फैक्टरी छोड़ सीए, अधिवक्ता और विभागीय अधिकारियों का चक्कर काटना पड़ता है। कुटीर उद्योग के प्रचार, प्रसार की जरूरत है। - मनीष चौबे, उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती काशी प्रांत

बजट 2024 में कई ऐलान हो सकते हैं। सरकार न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाना चाहती है। अभी कुल मिलाकर 7.50 लाख रुपये तक की एनुअल इनकम वालों की टैक्स देनदारी नहीं बनती है, यह बढ़कर 9-10 लाख रुपये तक हो सकती है। सर्वर डाउन जैसी समस्याओं से भी मुक्ति मिलनी चाहिए। - जमुना शुक्ला, चार्टर्ड एकाउंटेंट

कपड़ा उद्योग पर भी केंद्र सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। ताकि कारोबार बढ़े और देश में बेरोजगारी घटे। जीएसटी और आयकर की दरों में बदलाव से व्यापारी और आम लोगों की परचेजिंग पावर भी बढ़ेगी। उम्मीद है कि इस बार केंद्र सरकार बजट में कपड़ा उद्योग को राहत देगी। - विमलेश मौर्य, टेक्सटाइल उद्यमी

कर ढांचे को सरल बनाने की जरूरत है। करदाताओं को राहत की उम्मीद है। इनकम टैक्स में एक साल के अंदर आयकर अपील का निस्तारण कर देना चाहिए। इस व्यवस्था से छोटे और मध्यम वर्गीय कारोबारियों को राहत होगी। जीएसटी में नरकीय स्थिति है। छोटे व्यापारी पलायन की ओर है। - असीम जफर, पूर्व अध्यक्ष, इनकम टैक्स बार एसाेसिएशन

पेपर वर्क से छुटकारा मिले, इनकम टैक्स और जीएसटी में सरलीकरण बहुत जरूरी है। अन्यथा आने वाले समय में नई पीढ़ी व्यापार, उद्योग में आना नहीं चाहेगी। केवल औद्योगिक निवेश बढ़ाने से इंडस्ट्रीज का विकास नहीं होगा। उद्योगों को बचाने व बढ़ाने की दिशा में भी सरकार को सोचना होगा। - अंजनी कुमार सिंह, उद्यमी, चांदपुर औद्योगिक आस्थान

जीएसटी पेनाल्टी पर रोक लगनी चाहिए। मान लीजिए यदि किसी कारोबारी के रिटर्न में कुछ त्रुटियां हो गईं तो फिर नोटिस के साथ ही पेनाल्टी ठोंक दी जाती है। विभाग का चक्कर लगवाया जाता है। भयादोहन की स्थिति है, ऐसे में उद्योग, व्यापार चलायमान नहीं हो सकता है। राहत देनी पड़ेगी। - मनीष कटारिया, चैप्टर चेयरमैन, आईआईए
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यह मांगे भी आईं
  • प्रोपराइटरशिप व पार्टनरशिप एमएसएमई की भी कंपनी की तरह आयकर की दरें निर्धारित की जाए।
  • जीएसटी की दरों को कम करके असमानता दूर की जाए।
  • जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया आयकर की भांति पारदर्शी हो।
  • बेवजह नोटिस भेज उद्यमियों को जीएसटी कार्यालय बुलाकर उत्पीड़न व भयादोहन बंद किया जाए।
  • ए लेबर कोड की अनिश्चितता दूर की जाए।
  • श्रमिकों की मजदूरी उत्पादकता के सापेक्ष तय होनी चाहिए।
  • नियोक्ता को नकारा श्रमिकों को निकालने का अधिकार दिया जाए।
  • ईएसआईसी के स्थान पर सभी श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड दिया जाए।
  • वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण विवरण उद्यमियों से मांगने के बजाए विभाग खुद संबंधित विभागों के पोर्टल से लें।
  • इंडस्ट्रियल एरिया व इस्टेट अन्य कहीं भी जहां क्लस्टर में उद्योग स्थापित हों सरकार द्वारा कॉमन ईटीपी प्लांट लगाया जाए।
  • एमएसएमई के लिए आयकर की धारा 43 बी एच से ज्यादातर उद्यमी लाभान्वित हैं, लेकिन कुछ सेक्टर में परेशानी है, इसमें बदलाव हो।
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